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Rigveda Mandal 1 / Sukta 43 / Mantra 2

191 Sukta
9 Mantra
1/43/2
Devata- रुद्रः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यथा॑ नो॒ अदि॑तिः॒ कर॒त्पश्वे॒ नृभ्यो॒ यथा॒ गवे॑ । यथा॑ तो॒काय॑ रु॒द्रिय॑म् ॥

यथा॑ । नः॒ । अदि॑तिः । कर॑त् । पश्वे॑ । नृऽभ्यः॑ । यथा॑ । गवे॑ । यथा॑ । तो॒काय॑ । रु॒द्रिय॑म् ॥

Mantra without Swara
यथा नो अदितिः करत्पश्वे नृभ्यो यथा गवे । यथा तोकाय रुद्रियम् ॥

यथा । नः । अदितिः । करत् । पश्वे । नृभ्यः । यथा । गवे । यथा । तोकाय । रुद्रियम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 26 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यथा) जैसे (तोकाय) उत्पन्न हुए बालक के लिये (अदितिः) माता (यथा) जैसे (पश्वे) पशु समूह के लिये पशुओं का पालक (यथा) जैसे (नृभ्यः) मनुष्यों के लिये राजा (यथा) जैसे (गवे) इन्द्रियों के लिये जीव वा पृथिवी के लिये खेती करनेवाला (करत्) सुखों को करता है वैसे (नः) हम लोगों के लिये (रुद्रियम्) परमेश्वर वा पवनों का कर्म प्राप्त हो ॥२॥
Essence
इस मंत्र में उपमाऽलंकार है। जैसे माता-पिता पुत्र के लिये, गोपाल पशुओं के लिये और राजसभा प्रजा के लिये सुखकारी होते हैं वैसे ही सुखों के करने और कराने वाले परमेश्वर और पवन भी हैं ॥२॥
Subject
फिर वह क्या करता है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।