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Rigveda Mandal 1 / Sukta 42 / Mantra 8

191 Sukta
10 Mantra
1/42/8
Devata- पूषा Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒भि सू॒यव॑सं नय॒ न न॑वज्वा॒रो अध्व॑ने । पूष॑न्नि॒ह क्रतुं॑ विदः ॥

अ॒भि । सु॒ऽयव॑सम् । न॒य॒ । न । न॒व॒ऽज्वा॒रः । अध्व॑ने । पूष॑न् । इ॒ह । क्रतु॑म् । वि॒दः॒ ॥

Mantra without Swara
अभि सूयवसं नय न नवज्वारो अध्वने । पूषन्निह क्रतुं विदः ॥

अभि । सुयवसम् । नय । न । नवज्वारः । अध्वने । पूषन् । इह । क्रतुम् । विदः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 25 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (पूषन्) सभाध्यक्ष ! इस संसार वा जन्मांतर में (अध्वने) श्रेष्ठ मार्ग के लिये हम लोगों को (सुयवसम्) उत्तम यव आदि ओषधी होनेवाले देश को (अभिनय) सब प्रकार प्राप्त कीजिये और (क्रतुम्) उत्तम कर्म वा प्रज्ञा को (विदः) प्राप्त हूजिये जिससे इस मार्ग में चलके हम लोगों में (नवज्वारः) नवीन-२ सन्ताप (न) न हों ॥८॥
Essence
हे सभाध्यक्ष ! आप अपनी कृपा से श्रेष्ठ देश वा उत्तम गुण हम लोगों को दीजिये और सब दुःखों को निवारण कर सुखों को प्राप्त कीजिये, हे सभासेनाध्यक्ष ! विद्वान् लोगों को विनयपूर्वक पालन से विद्या पढ़ाकर इस राज्य में सुख युक्त कीजिये ॥८॥
Subject
फिर उसने किसको प्राप्त होना चाहिये, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।