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Rigveda Mandal 1 / Sukta 42 / Mantra 6

191 Sukta
10 Mantra
1/42/6
Devata- पूषा Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अधा॑ नो विश्वसौभग॒ हिर॑ण्यवाशीमत्तम । धना॑नि सु॒षणा॑ कृधि ॥

अधः॑ । नः॒ । वि॒श्व॒ऽसौ॒भ॒ग॒ । हिर॑ण्यवाशीमत्ऽतम । धना॑नि । सु॒ऽसना॑ । कृ॒धि॒ ॥

Mantra without Swara
अधा नो विश्वसौभग हिरण्यवाशीमत्तम । धनानि सुषणा कृधि ॥

अधः । नः । विश्वसौभग । हिरण्यवाशीमत्तम । धनानि । सुसना । कृधि॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 25 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
हे (विश्वसौभग) संपूर्ण ऐश्वर्य्यों को प्राप्त होने (हिरण्यवाशीमत्तम) अतिशय करके सत्य के प्रकाशक उत्तम कीर्त्ति और सुशिक्षित वाणी युक्त सभाध्यक्ष ! आप (न) हम लोगों के लिये (सुषणा) सुखसे सेवन करने योग्य (धनानि) विद्याधर्म और चक्रवर्त्ति राज्य की लक्ष्मी से सिद्ध किये हुए धनों को प्राप्त कराके (अध) पश्चात् हम लोगों को सुखी (कृधि) कीजिये ॥६॥
Essence
ईश्वरे के अनन्त सौभाग्य वा सभासेना न्यायाधीश धार्मिक मनुष्य के चक्रवर्त्ति राज्य आदि सौभाग्य होने से इन दोनों के आश्रय से मनुष्यों को असंख्यात विद्या सुवर्णा आदि धनों की प्राप्ति से अत्यन्त सुखों के भोग को प्राप्त होना वा कराना चाहिये ॥६॥
Subject
फिर वह न्यायाधीश प्रजा में क्या करे, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

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