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Rigveda Mandal 1 / Sukta 42 / Mantra 5

191 Sukta
10 Mantra
1/42/5
Devata- पूषा Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ तत्ते॑ दस्र मन्तुमः॒ पूष॒न्नवो॑ वृणीमहे । येन॑ पि॒तॄनचो॑दयः ॥

आ । तत् । ते॒ । द॒स्र॒ । म॒न्तु॒ऽमः॒ । पू॒ष॒न् । अवः॑ । वृ॒णी॒म॒हे॒ । येन॑ । पि॒तॄन् । अचो॑दयः ॥

Mantra without Swara
आ तत्ते दस्र मन्तुमः पूषन्नवो वृणीमहे । येन पितॄनचोदयः ॥

आ । तत् । ते । दस्र । मन्तुमः । पूषन् । अवः । वृणीमहे । येन । पितॄन् । अचोदयः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 24 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (दस्र) दुष्टों को नाश करने (मन्तुमः) उत्तम ज्ञानयुक्त (पूषन्) सर्वथा पुष्टि करनेवाले विद्वान् ! आप (येन) जिस रक्षादि से (पितॄन्) अवस्था वा ज्ञान से वृद्धों को (अचोदयः) प्रेरणा करो (तत्) उस (ते) आपके (अवः) रक्षादि को हम लोग (आवृणीमहे) सर्वथा स्वीकार करें ॥५॥
Essence
जैसे प्रेम प्रीति के साथ सेचन करने से उत्पन्न करने वा पढ़ानेवाले ज्ञान वा अवस्था से वृद्धों को तृप्त करें वैसे ही सब प्रजाओं के सुख के लिये दुष्ट मनुष्यों को दण्ड दे के धार्मिकों को सदा सुखी रक्खें ॥५॥
Subject
फिर वह न्यायाधीश कैसा होवे, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।