Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 41 / Mantra 6

191 Sukta
9 Mantra
1/41/6
Devata- आदित्याः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स रत्नं॒ मर्त्यो॒ वसु॒ विश्वं॑ तो॒कमु॒त त्मना॑ । अच्छा॑ गच्छ॒त्यस्तृ॑तः ॥

सः । रत्न॑म् । मर्त्यः॑ । वसु॑ । विश्व॑म् । तो॒कम् । उ॒त । त्मना॑ । अच्छ॑ । ग॒च्छ॒ति॒ । अस्तृ॑तः ॥

Mantra without Swara
स रत्नं मर्त्यो वसु विश्वं तोकमुत त्मना । अच्छा गच्छत्यस्तृतः ॥

सः । रत्नम् । मर्त्यः । वसु । विश्वम् । तोकम् । उत । त्मना । अच्छ । गच्छति । अस्तृतः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 23 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (अस्तृतः) हिंसा रहित (मर्त्येः) मनुष्य है (सः) वह (त्मना) आत्मा मन वा प्राण से (विश्वम्) सब (रत्नम्) मनुष्यों के मनों के रमण करानेवाले (वसु) उत्तम से उत्तम द्रव्य (उत) और (तोकम्) सब उत्तम गुणों से युक्त पुत्रों को (अच्छ गच्छति) अच्छे प्रकार प्राप्त होता है ॥६॥
Essence
विद्वान् मनुष्यों से अच्छे प्रकार रक्षा किये हुए मनुष्य आदि प्राणी सब उत्तम से उत्तम पदार्थ और सन्तानों को प्राप्त होते हैं रक्षा के विना किसी पुरुष वा प्राणी की बढ़ती नहीं होती ॥६॥
Subject
फिर वह रक्षा को प्राप्त होकर किसको प्राप्त होता है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।