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Rigveda Mandal 1 / Sukta 41 / Mantra 5

191 Sukta
9 Mantra
1/41/5
Devata- आदित्याः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यं य॒ज्ञं नय॑था नर॒ आदि॑त्या ऋ॒जुना॑ प॒था । प्र वः॒ स धी॒तये॑ नशत् ॥

यम् । य॒ज्ञम् । नय॑थ । न॒रः॒ । आदि॑त्याः । ऋ॒जुना॑ । प॒था । प्र । वः॒ । सः । धी॒तये॑ । न॒श॒त् ॥

Mantra without Swara
यं यज्ञं नयथा नर आदित्या ऋजुना पथा । प्र वः स धीतये नशत् ॥

यम् । यज्ञम् । नयथ । नरः । आदित्याः । ऋजुना । पथा । प्र । वः । सः । धीतये । नशत्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 22 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (आदित्याः) सकलविद्याओं से सूर्य्यवत् प्रकाशमान (नरः) न्याययुक्त राजसभासदो ! आप लोग (धीतये) सुखों को प्राप्त करानेवाली क्रिया के लिये (यम्) जिस (यज्ञम्) राजधर्मयुक्त व्यवहार को (ऋजुना) शुद्ध सरल (पथा) मार्ग से (नयथ) प्राप्त होते हो (सः) सो (वः) तुम लोगों को (प्रणशत्) नष्ट करने हारा नहीं होता ॥५॥
Essence
इस मन्त्र में पूर्व मंत्र से (न) इस पद की अनुवृत्ति हैं जहां विद्वान् लोग सभा सेनाध्यक्ष सभा में रहनेवाले भृत्य होकर विनयपूर्वक न्याय करते हैं, वहां सुख का नाश कभी नहीं होता ॥५॥
Subject
फिर ये किस की रक्षा कर किस को प्राप्त होते हैं, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।