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Rigveda Mandal 1 / Sukta 40 / Mantra 6

191 Sukta
8 Mantra
1/40/6
Devata- बृहस्पतिः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- सतःपङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
तमिद्वो॑चेमा वि॒दथे॑षु शं॒भुवं॒ मन्त्रं॑ देवा अने॒हस॑म् । इ॒मां च॒ वाचं॑ प्रति॒हर्य॑था नरो॒ विश्वेद्वा॒मा वो॑ अश्नवत् ॥

तम् । इत् । वो॒चे॒म॒ । वि॒दथे॑षु । श॒म्भुव॑म् । मन्त्र॑म् । दे॒वाः॒ । अ॒ने॒हस॑म् । इ॒माम् । च॒ । वाच॑म् । प्रति॒ऽहर्य॑थ । न॒रः॒ । विश्वा॑ । इत् । वा॒मा । वः॒ । अ॒श्न॒व॒त् ॥

Mantra without Swara
तमिद्वोचेमा विदथेषु शंभुवं मन्त्रं देवा अनेहसम् । इमां च वाचं प्रतिहर्यथा नरो विश्वेद्वामा वो अश्नवत् ॥

तम् । इत् । वोचेम । विदथेषु । शम्भुवम् । मन्त्रम् । देवाः । अनेहसम् । इमाम् । च । वाचम् । प्रतिहर्यथ । नरः । विश्वा । इत् । वामा । वः । अश्नवत्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 21 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
हे (देवाः) विद्वानो ! (वः) तुम लोगों के लिये हम लोग (विदथेषु) जानने योग्य पढ़ने-पढ़ाने आदि व्यवहारों में जिस (अनेहसम्) अहिंसनीय सर्वदा रक्षणीय दोषरहित (शंभुवम्) कल्याणकारक (मंत्रम्) पदार्थों को मनन करानेवाले मंत्र अर्थात् श्रुति समूह को (वोचेम) उपदेश करें (तम्) उस वेद को (इत्) ही तुम लोग ग्रहण करो (इत्) जो (इमाम्) इस (वाचम्) वेदवाणी को बार-२ जानों तो (विश्वा) सब (वामा) प्रशंसनीय वाणी (वः) तुम लोगों को (अश्नवत्) प्राप्त होवे ॥६॥
Essence
विद्वानों को योग्य है कि विद्या के प्रचार के लिये मनुष्यों को निरन्तर अर्थ अंग उपांग रहस्य स्वर और हस्तक्रिया सहित वेदों को उपदेश करें और ये लोग अर्थात् मनुष्यमात्र इन विद्वानों से सब वेद विद्या को साक्षात् करें जो कोई पुरुष सुख चाहें तो वह विद्वानों के संग से विद्या को प्राप्त करें तथा इस विद्या के विना किसी को सत्य सुख नहीं होता इससे पढ़ने-पढ़ाने वालों को प्रयत्न से सकल विद्याओं को ग्रहण करना वा कराना चाहिये ॥६॥
Subject
अब अगले मंत्र में सब मनुष्यों के लिये वेदों के पढ़ने का अधिकार है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।