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Rigveda Mandal 1 / Sukta 39 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/39/7
Devata- मरूतः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- उपरिष्टाद्विराड् बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
आ वो॑ म॒क्षू तना॑य॒ कं रुद्रा॒ अवो॑ वृणीमहे । गन्ता॑ नू॒नं नोऽव॑सा॒ यथा॑ पु॒रेत्था कण्वा॑य बि॒भ्युषे॑ ॥

आ । वः॒ । म॒क्षु । तना॑य । कम् । रुद्राः॑ । अवः॑ । वृ॒णी॒म॒हे॒ । गन्त॑ । नू॒नम् । नः॒ । अव॑स् ॒यथा॑ । पु॒रा । इ॒त्था । कण्वा॑य । बि॒भ्युषे॑ ॥

Mantra without Swara
आ वो मक्षू तनाय कं रुद्रा अवो वृणीमहे । गन्ता नूनं नोऽवसा यथा पुरेत्था कण्वाय बिभ्युषे ॥

आ । वः । मक्षु । तनाय । कम् । रुद्राः । अवः । वृणीमहे । गन्त । नूनम् । नः । अवस् यथा । पुरा । इत्था । कण्वाय । बिभ्युषे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 19 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (रुद्राः) दुष्टों के रोदन करानेवाले ४४ वर्ष पर्यन्त अखण्डित ब्रह्मचर्य सेवन से सकल विद्याओं को प्राप्त विद्वान लोगो ! (यथा) जैसे हम लोग (वः) आप लोगों के लिये (अवसा) रक्षादि से (मक्षु) शीघ्र (नूनम्) निश्चित (कम्) सुख को (वृणीमहे) सिद्ध करते है (इत्था) ऐसे तुम भी (नः) हमारे वास्ते (अवः) सुख वर्द्धक रक्षादि कर्म (गन्त) किया करो और जैसे ईश्वर (बिभ्युपे) दुष्टप्राणी वा दुःखों से भयभीत (तनाय) सबको सद्विद्या और धर्म के उपदेश से सुखकारक (कण्वाय) आप्त विद्वान् के अर्थ रक्षा करता है वैसे तुम और हम मिलके सब प्रजा की रक्षा सदा किया करें ॥७॥
Essence
इस मंत्र में उपमालङ्कार है। जैसे मेधावी विद्वान् लोग वायु आदि के द्रव्य और गुणों के योग से भय को निवारण करके तुरन्त सुखी होते हैं। वैसे हम लोगों को भी होना चाहिये ॥७॥
Subject
फिर वे कैसे हों, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।