Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 39 / Mantra 6

191 Sukta
10 Mantra
1/39/6
Devata- मरूतः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- विराट्सतःपङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
उपो॒ रथे॑षु॒ पृष॑तीरयुग्ध्वं॒ प्रष्टि॑र्वहति॒ रोहि॑तः । आ वो॒ यामा॑य पृथि॒वी चि॑दश्रो॒दबी॑भयन्त॒ मानु॑षाः ॥

उपो॒ इति॑ । रथे॑षु । पृष॑तीः । अ॒यु॒ग्ध्व॒म् । प्रष्टिः॑ । व॒ह॒ति॒ । रोहि॑तः । आ । वः॒ । यामा॑य । पृ॒थि॒वी । चि॒त् । अ॒श्रो॒त् । अबी॑भयन्त । मानु॑षाः ॥

Mantra without Swara
उपो रथेषु पृषतीरयुग्ध्वं प्रष्टिर्वहति रोहितः । आ वो यामाय पृथिवी चिदश्रोदबीभयन्त मानुषाः ॥

उपो इति । रथेषु । पृषतीः । अयुग्ध्वम् । प्रष्टिः । वहति । रोहितः । आ । वः । यामाय । पृथिवी । चित् । अश्रोत् । अबीभयन्त । मानुषाः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 19 Mantra » 1

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे (मानुषाः) विद्वान् लोगो ! तुम (वः) अपने (यामाय) स्थानान्तर में जाने के लिये (पृष्टिः) प्रश्नोत्तरादि विद्या व्यवहार से विदित (रोहितः) रक्त गुणयुक्त अग्नि (पृथिवी) स्थल जल अन्तरिक्ष मे जिन को (उपवहति) अच्छे प्रकार चलाता है जिनके शब्दों को (अश्रोत्) सुनते और (अबीभयन्त) भय को प्राप्त होते हैं उन (रथेषु) रथों में (पृषतीः) वायुओं को (अयुग्ध्वम्) युक्त करो ॥६॥
Essence
जो मनुष्य यानों में जल अग्नि और वायु को युक्त कर उनमें बैठ गमनागमन करें तो सुख ही से सर्वत्र जाने-आने को समर्थ हों ॥६॥
Subject
फिर मनुष्यों को किसके साथ इनको युक्त करके कार्यों को सिद्ध करने चाहिये, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.