Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 38 / Mantra 7

191 Sukta
15 Mantra
1/38/7
Devata- मरूतः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स॒त्यं त्वे॒षा अम॑वन्तो॒ धन्व॑ञ्चि॒दा रु॒द्रिया॑सः । मिहं॑ कृण्वन्त्यवा॒ताम् ॥

स॒त्यम् । त्वे॒षाः । अम॑ऽवन्तः । धन्व॑म् । चि॒त् । आ । रु॒द्रिया॑सः । मिह॑म् । कृ॒ण्व॒न्ति॒ । अ॒वा॒ताम् ॥

Mantra without Swara
सत्यं त्वेषा अमवन्तो धन्वञ्चिदा रुद्रियासः । मिहं कृण्वन्त्यवाताम् ॥

सत्यम् । त्वेषाः । अमवन्तः । धन्वम् । चित् । आ । रुद्रियासः । मिहम् । कृण्वन्ति । अवाताम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 16 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! तुम लोग जैसे (धन्वन्) अन्तरिक्ष में (त्वेषाः) बाहर भीतर घिसने से उत्पन्न हुई बिजुली में प्रदीप्त (अमवन्तः) जिन का रोगों और गमनागमन रूप वालों के साथ सम्बन्ध है (रुद्रियासः) प्राणियों के जीने के निमित्त वायु (अवाताम्) हिंसा रहित (मिहम्) सींचनेवाली वृष्टि को (आकृण्वन्ति) अच्छे प्रकार संपादन करते हैं और इन का (सत्यम्) सत्य कर्म है (चित्) वैसे ही सत्य कर्म का अनुष्ठान किया करो ॥७॥
Essence
मनुष्यों को चाहिये कि जैसे अन्तरिक्ष में रहने तथा सत्यगुण और स्वभाववाले पवन वृष्टि के हेतु हैं वे ही युक्ति से सेवन किये हुए अनुकूल होकर सुख देते और युक्ति रहित सेवन किये प्रतिकूल होकर दुःखदायक होते हैं वैसे युक्ति से धर्मानुकूल कर्मों का सेवन करें ॥७॥
Subject
फिर वे कैसे हों, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.