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Rigveda Mandal 1 / Sukta 38 / Mantra 3

191 Sukta
15 Mantra
1/38/3
Devata- मरूतः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- पादनिचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
क्व॑ वः सु॒म्ना नव्यां॑सि॒ मरु॑तः॒ क्व॑ सुवि॒ता । क्वो॒ ३॒॑ विश्वा॑नि॒ सौभ॑गा ॥

क्व॑ । वः॒ । सु॒म्ना । नव्यां॑सि । मरु॑तः । क्व॑ । सु॒वि॒ता । क्वो॒ इति॑ । विश्वा॑नि । सौभ॑गा ॥

Mantra without Swara
क्व वः सुम्ना नव्यांसि मरुतः क्व सुविता । क्वो ३ विश्वानि सौभगा ॥

क्व । वः । सुम्ना । नव्यांसि । मरुतः । क्व । सुविता । क्वो३ इति । विश्वानि । सौभगा॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 15 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मरुतः) वायु के समान शीघ्र गमन करनेवाले मनुष्यो ! तुम लोग विद्वानों के समीप प्राप्त होकर (वः) आप लोगों के (विश्वानि) सब (नव्यांसि) नवीन (सुम्ना) सुख (क्व) कहाँ सब (सुविता) प्रेरणा करानेवाले गुण (क्व) कहाँ और सब नवीन (सौभगा) सौभाग्य प्राप्ति करानेवाले कर्म (क्वो) कहाँ है ऐसा पूछो ॥३॥
Essence
इस मंत्र में लुप्तोपमालङ्कार है। हे शुभ कर्मों में वायु के समान शीघ्र चलनेवाले मनुष्यों ! तुम लोगों को चाहिये कि विद्वानों के प्रति पूछ कर जिस प्रकार नवीन क्रिया की सिद्धि के निमित्त कर्म प्राप्त होवें वैसा अच्छे प्रकार निरन्तर यत्न किया करो ॥३॥
Subject
फिर भी उक्त विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।