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Rigveda Mandal 1 / Sukta 38 / Mantra 10

191 Sukta
15 Mantra
1/38/10
Devata- मरूतः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अध॑ स्व॒नान्म॒रुतां॒ विश्व॒मा सद्म॒ पार्थि॑वम् । अरे॑जन्त॒ प्र मानु॑षाः ॥

अध॑ । स्व॒नात् । म॒रुताम् । विश्व॑म् । आ । सद्म॑ । पार्थि॑वम् । अरे॑जन्त । प्र । मानु॑षाः ॥

Mantra without Swara
अध स्वनान्मरुतां विश्वमा सद्म पार्थिवम् । अरेजन्त प्र मानुषाः ॥

अध । स्वनात् । मरुताम् । विश्वम् । आ । सद्म । पार्थिवम् । अरेजन्त । प्र । मानुषाः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 16 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (मानुषाः) मननशील मनुष्यो ! तुम जिन (मरुताम्) पवनों के (स्वनात्) उत्पन्न शब्द के होने से (अध) अनन्तर (विश्वम्) सब (पार्थिवम्) पृथिवी में विदित वस्तुमात्र का (सद्म) स्थान कंपता और प्राणिमात्र (अरेजन्त) अच्छे प्रकार कंपित होते हैं इस प्रकार जानो ॥१०॥
Essence
हे ज्योतिष्य शास्त्र के विद्वान लोगो ! आप पवनों के योग ही के सब मूर्त्तिमान् द्रव्य चेष्टा को प्राप्त होते प्राणी लोग बिजुली के भयंकर शब्द में भय को प्राप्त होकर कंपित होते और भूगोल आदि प्रतिक्षण भ्रमण किया करते हैं ऐसा निश्चित समझों ॥१०॥
Subject
फिर इन पवनों के योग से क्या होता है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।