Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 36 / Mantra 4

191 Sukta
20 Mantra
1/36/4
Devata- अग्निः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- निचृत्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
दे॒वास॑स्त्वा॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा सं दू॒तं प्र॒त्नमि॑न्धते । विश्वं॒ सो अ॑ग्ने जयति॒ त्वया॒ धनं॒ यस्ते॑ द॒दाश॒ मर्त्यः॑ ॥

दे॒वासः॑ । त्वा॒ । वरु॑णः । मि॒त्रः । अ॒र्य॒मा । सम् । दू॒तम् । प्र॒त्नम् । इ॒न्ध॒ते॒ । विश्व॑म् । सः । अ॒ग्ने॒ । ज॒य॒ति॒ । त्वया॑ । धन॑म् । यः । ते॒ । द॒दाश॑ । मर्त्यः॑ ॥

Mantra without Swara
देवासस्त्वा वरुणो मित्रो अर्यमा सं दूतं प्रत्नमिन्धते । विश्वं सो अग्ने जयति त्वया धनं यस्ते ददाश मर्त्यः ॥

देवासः । त्वा । वरुणः । मित्रः । अर्यमा । सम् । दूतम् । प्रत्नम् । इन्धते । विश्वम् । सः । अग्ने । जयति । त्वया । धनम् । यः । ते । ददाश । मर्त्यः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 8 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) धर्म विद्या श्रेष्ठ गुणों से प्रकाशमान सभापते ! (यः) जो (ते) तेरा (दूतः) दूत (मर्त्त्यः) मनुष्य तेरे लिये (धनम्) विद्या राज्य सुवर्णादि श्री को (ददाश) देता है तथा जो (त्वया) तेरे साथ शत्रुओं को (जयति) जीतता है (मित्रः) सबका सुहृद् (वरुणः) सबसे उत्तम (अर्यमा) न्यायकारी (देवासः) ये सब सभ्य विद्वान् मनुष्य जिसको (समिन्धते) अच्छे प्रकार प्रशंसित जानकर स्वीकार के लिये शुभगुणों से प्रकाशित करें जो (त्वा) तुझ और सब प्रजा को प्रसन्न रक्खे (सः) वह दूत (प्रत्नम्) जोकि कारणरूप से अनादि है (विश्वम्) सब राज्य को सुरक्षित रखने को योग्य होता है ॥४॥
Essence
कोई भी मनुष्य सब शास्त्रों में प्रवीण राजधर्म को ठीक-२ जानने, पर अपर इतिहासों के वेत्ता, धर्मात्मा, निर्भयता से सब विषयों के वक्ता, शूरवीर दूतों और उत्तम राजा सहित सभासदों के विना राज्य को पाने, पालने, बढ़ाने और परोपकार में लगाने को समर्थ नहीं हो सकते इससे पूर्वोक्त प्रकार ही से राज्य की प्राप्ति आदि का विधान सब लोग सदा किया करें ॥४॥
Subject
फिर वह दूत कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।