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Rigveda Mandal 1 / Sukta 36 / Mantra 19

191 Sukta
20 Mantra
1/36/19
Devata- अग्निः Rishi- कण्वो घौरः Chhanda- पथ्यावृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
नि त्वाम॑ग्ने॒ मनु॑र्दधे॒ ज्योति॒र्जना॑य॒ शश्व॑ते । दी॒देथ॒ कण्व॑ ऋ॒तजा॑त उक्षि॒तो यं न॑म॒स्यन्ति॑ कृ॒ष्टयः॑ ॥

नि । त्वाम् । अ॒ग्ने॒ । मनुः॑ । द॒धे॒ । ज्योतिः॑ । जना॑य । शश्व॑ते । दी॒देथ॑ । कण्वे॑ । ऋ॒तऽजा॑तः । उ॒क्षि॒तः । यम् । न॒म॒स्यन्ति॑ । कृ॒ष्टयः॑ ॥

Mantra without Swara
नि त्वामग्ने मनुर्दधे ज्योतिर्जनाय शश्वते । दीदेथ कण्व ऋतजात उक्षितो यं नमस्यन्ति कृष्टयः ॥

नि । त्वाम् । अग्ने । मनुः । दधे । ज्योतिः । जनाय । शश्वते । दीदेथ । कण्वे । ऋतजातः । उक्षितः । यम् । नमस्यन्ति । कृष्टयः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 11 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) परमात्मन् ! (यम्) जिस परमात्मा (त्वाम्) आपको (शश्वते) अनादि स्वरूप (जनाय) जीवों की रक्षा के लिये (कृष्टयः) सब विद्वान् मनुष्य (नमस्यन्ति) पूजा और हे विद्वान् लोगो ! जिसको आप (दीदेथ) प्रकाशित करते हैं उस (ज्योतिः) ज्ञान के प्रकाश करनेवाले परब्रह्म को (ऋतजातः) सत्याचरण से प्रसिद्ध (उक्षितः) आनन्दित (मनुः) विज्ञानयुक्त मैं (कण्वे) बुद्धिमान मनुष्य में (निदथे) स्थापित करता हूँ उसकी सब मनुष्य लोग उपासना करें ॥१९॥
Essence
सबके पूजने योग्य परमात्मा के कृपाकटाक्ष से प्रजा की रक्षा के लिये राज्य के अधिकारी सब मनुष्यों को योग्य है कि सत्यव्यवहार की प्रसिद्धि से धर्मात्माओं को आनन्द और दुष्टों को ताड़ना देवें ॥१९॥
Subject
फिर उन राजपुरुषों के सहायक जगदीश्वर कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मंत्र में किया है।