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Rigveda Mandal 1 / Sukta 35 / Mantra 8

191 Sukta
11 Mantra
1/35/8
Devata- सविता Rishi- हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः Chhanda- भुरिक्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अ॒ष्टौ व्य॑ख्यत्क॒कुभः॑ पृथि॒व्यास्त्री धन्व॒ योज॑ना स॒प्त सिन्धू॑न् । हि॒र॒ण्या॒क्षः स॑वि॒ता दे॒व आगा॒द्दध॒द्रत्ना॑ दा॒शुषे॒ वार्या॑णि ॥

अ॒ष्टौ । वि । अ॒ख्य॒त् । क॒कुभः॑ । पृ॒थि॒व्याः । त्री । धन्व॑ । योज॑ना । स॒प्त । सिन्धू॑न् । हि॒र॒ण्य॒ऽअ॒क्षः । स॒वि॒ता । दे॒वः । आ । अ॒गा॒त् । दध॑त् । रत्ना॑ । दा॒शुषे॑ । वार्या॑णि ॥

Mantra without Swara
अष्टौ व्यख्यत्ककुभः पृथिव्यास्त्री धन्व योजना सप्त सिन्धून् । हिरण्याक्षः सविता देव आगाद्दधद्रत्ना दाशुषे वार्याणि ॥

अष्टौ । वि । अख्यत् । ककुभः । पृथिव्याः । त्री । धन्व । योजना । सप्त । सिन्धून् । हिरण्यअक्षः । सविता । देवः । आ । अगात् । दधत् । रत्ना । दाशुषे । वार्याणि॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 7 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे सभेश ! जैसे जो (हिरण्याक्षः) जिसके सुवर्ण के समान ज्योति हैं वह (सविता) वृष्टि उत्पन्न करनेवाला (देवः) द्योतनात्मक सूर्यलोक (पृथिव्याः) पृथिवी से संबन्ध रखनेवाली (अष्टौ) आठ (ककुभः) दिशा अर्थात् चार दिशा और चार उपदिशाओं (त्री) तीन भूमि अन्तरिक्ष और प्रकाश के अर्थात् ऊपर नीचे और मध्य में ठहरनेवाले (धन्व) प्राप्त होने योग्य (योजना) सब वस्तु के आधार तीन लोकों और (सप्त) सात (सिंधून्) भूमि अंतरिक्ष वा ऊपर स्थित हुए जलसमुदायों को (व्यख्यत्) प्रकाशित करता है वह (दाशुषे) सर्वोपकारक विद्यादि उत्तम पदार्थ देनेवाले यजमान के लिये (वार्याणि) स्वीकार करने योग्य (रत्ना) पृथिवी आदि वा सुवर्ण आदि रमणीय रत्नों को (दधत्) धारण कर्ता हुआ (आगात्) अच्छे प्रकार प्राप्त होता है वैसे तुम भी वर्त्तो ॥८॥
Essence
इस मंत्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे यह सूर्यलोक सब मूर्त्तिमान् पदार्थो का प्रकाश छेदन वायुद्वारा अन्तरिक्ष में प्राप्त और वहां से नीचे गेर कर सब रमणीय सुखों को जीवों के लिये उत्पन्न करता और पृथिवी में स्थित और उनचास क्रोश पर्यन्त अन्तरिक्ष में स्थूल सूक्ष्म लघु और गुरु रूप से स्थित हुए जलों को अर्थात् जिनका सप्तसिंधु नाम है आकर्षणशक्ति से धारण करता है वैसे सब विद्वान् लोग विद्या और धर्म से सब प्रजा को धारण करके सबको आनन्द में रक्खें ॥८॥
Subject
फिर इसके कृत्य का उपदेश अगले मन्त्र में किया है।