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Rigveda Mandal 1 / Sukta 34 / Mantra 9

191 Sukta
12 Mantra
1/34/9
Devata- अश्विनौ Rishi- हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः Chhanda- स्वराट्पङ्क्ति Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
क्व १॒॑ त्री च॒क्रा त्रि॒वृतो॒ रथ॑स्य॒ क्व १॒॑ त्रयो॑ व॒न्धुरो॒ ये सनी॑ळाः । क॒दा योगो॑ वा॒जिनो॒ रास॑भस्य॒ येन॑ य॒ज्ञं ना॑सत्योपया॒थः ॥

क्व॑ । त्री । च॒क्रा । त्रि॒ऽवृतः॑ । रथ॑स्य । क्व॑ । त्रयः॑ । व॒न्धुरः॑ । ये । सऽनी॑ळाः । क॒दा । योगः॑ । वा॒जिनः॒ । रास॑भस्य । येन॑ । य॒ज्ञम् । ना॒स॒त्या॒ । उ॒प॒ऽया॒थः ॥

Mantra without Swara
क्व १ त्री चक्रा त्रिवृतो रथस्य क्व १ त्रयो वन्धुरो ये सनीळाः । कदा योगो वाजिनो रासभस्य येन यज्ञं नासत्योपयाथः ॥

क्व । त्री । चक्रा । त्रिवृतः । रथस्य । क्व । त्रयः । वन्धुरः । ये । सनीळाः । कदा । योगः । वाजिनः । रासभस्य । येन । यज्ञम् । नासत्या । उपयाथः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 3 Varga » 5 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (नासत्या) सत्य गुण और स्वभाववाले कारीगर लोगो ! तुम दोनों (यज्ञम्) दिव्य गुण युक्त विमान आदि यान से जाने-आने योग्य मार्ग को (कदा) कब (उपयाथः) शीघ्र जैसे निकट पहुंच जावें वैसे पहुंचते हो और (येन) जिससे पहुंचते हो उस (रासभस्य) शब्द करनेवाले (वाजिनः) प्रशंसनीय वेग से युक्त (त्रिवृतः) रचन चालन आदि सामग्री से पूर्ण (रथस्य) और भूमि जल अन्तरिक्ष मार्ग में रमण करानेवाले विमान में (क्व) कहाँ (त्री) तीन (चक्रा) चक्र रचने चाहिये और इस विमानादि यान में (ये) जो (सनीडाः) बराबर बन्धनों के स्थान वा अग्नि रहने का घर (बन्धुरः) नियमपूर्वक चलाने के हेतु कोष्ठ होते हैं उनका (योगः) योग (क्व) कहाँ करना चाहिये ये तीन प्रश्न हैं ॥९॥
Essence
इस मंत्र में कहे हुए तीन प्रश्नों के ये उत्तर जानने चाहिये विभूति की इच्छा रखनेवाले पुरुषों को उचित है कि रथ के आदि, मध्य और अन्त में सब कलाओं के बन्धनों के आधार के लिये तीन बंधन विशेष संपादन करें तथा तीन कला घूमने-घुमाने के लिये संपादन करें एक मनुष्यों के बैठने दूसरी अग्नि को स्थिति और तीसरी जल की स्थिति के लिये करके जब-जब चलने की इच्छा हो तब-२ यथा योग्य जलकाष्ठों को स्थापन, अग्नि को युक्त और कला के वायु से प्रदीप्त करके बाफ के वेग से चलाये हुए यान से शीघ्र दूर स्थान को भी निकट के समान जाने को समर्थ होवें। क्योंकि इस प्रकार किये विना निर्विघ्नता से स्थानान्तर को कोई मनुष्य शीघ्र नहीं जा सकता ॥९॥
Subject
फिर उनसे क्या करना चाहिये, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है।