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Rigveda Mandal 1 / Sukta 31 / Mantra 4

191 Sukta
18 Mantra
1/31/4
Devata- अग्निः Rishi- हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः Chhanda- भुरिक्त्रिष्टुप् Swara- निषादः
Mantra with Swara
त्वम॑ग्ने॒ मन॑वे॒ द्याम॑वाशयः पुरू॒रव॑से सु॒कृते॑ सु॒कृत्त॑रः। श्वा॒त्रेण॒ यत्पि॒त्रोर्मुच्य॑से॒ पर्या त्वा॒ पूर्व॑मनय॒न्नाप॑रं॒ पुनः॑ ॥

त्वम् । अ॒ग्ने॒ । मन॑वे । द्याम् । अ॒वा॒श॒यः॒ । पु॒रू॒रव॑से । सु॒ऽकृते॑ । सु॒कृत्ऽत॑रः । श्वा॒त्रेण॑ । यत् । पि॒त्रोः । मुच्य॑से । परि॑ । आ । त्वा॒ । पूर्व॑म् । अ॒न॒य॒न् । आ । अप॑रम् । पुन॒रिति॑ ॥

Mantra without Swara
त्वमग्ने मनवे द्यामवाशयः पुरूरवसे सुकृते सुकृत्तरः। श्वात्रेण यत्पित्रोर्मुच्यसे पर्या त्वा पूर्वमनयन्नापरं पुनः ॥

त्वम्। अग्ने। मनवे। द्याम्। अवाशयः। पुरूरवसे। सुऽकृते। सुकृत्ऽतरः। श्वात्रेण। यत्। पित्रोः। मुच्यसे। परि। आ। त्वा। पूर्वम्। अनयन्। आ। अपरम्। पुनरिति ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 32 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) जगदीश्वर ! (सुकृत्तरः) अत्यन्त सुकृत कर्म करनेवाले (त्वम्) सर्वप्रकाशक आप (पुरूरवसे) जिसके बहुत से उत्तम-उत्तम विद्यायुक्त वचन हैं और (सृकृते) अच्छे-अच्छे कामों को करनेवाला है, उस (मनवे) ज्ञानवान् विद्वान् के लिये (द्याम्) उत्तम सूर्यलोक को (अवाशयः) प्रकाशित किये हुए हैं। विद्वान् लोग (श्वात्रेण) धन और विज्ञान के साथ वर्त्तमान (पूर्वम्) पूर्वकल्प वा पूर्वजन्म में प्राप्त होने योग्य और (अपरम्) इसके आगे जन्म-मरण आदि से अलग प्रतीत होनेवाले आपको (पुनः) बार-बार (अनयन्) प्राप्त होते हैं। हे जीव ! तू जिस परमेश्वर को वेद और विद्वान् लोग उपदेश से प्रतीत कराते हैं, जो (त्वा) तुझे (श्वात्रेण) धन और विज्ञान के साथ वर्त्तमान (पूर्वम्) पिछले (अपरम्) अगले देह को प्राप्त कराता है और जिसके उत्तम ज्ञान से मुक्त दशा में (पित्रोः) माता और पिता से तू (पर्यामुच्यसे) सब प्रकार के दुःख से छूट जाता तथा जिसके नियम से मुक्ति से महाकल्प के अन्त में फिर संसार में आता है, उसका विज्ञान वा सेवन तू (आ) अच्छे प्रकार कर ॥ ४ ॥
Essence
जिस जगदीश्वर ने सूर्य आदि जगत् रचा वा जिस विद्वान् से सुशिक्षा का ग्रहण किया जाता है उस परमेश्वर वा विद्वान् की प्राप्ति अच्छे कर्मों से होती है तथा चक्रवर्त्ति राज्य आदि धन का सुख भी वैसे ही होता है ॥ ४ ॥
Subject
फिर वह ईश्वर कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है ॥