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Rigveda Mandal 1 / Sukta 31 / Mantra 12

191 Sukta
18 Mantra
1/31/12
Devata- अग्निः Rishi- हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- निषादः
Mantra with Swara
त्वं नो॑ अग्ने॒ तव॑ देव पा॒युभि॑र्म॒घोनो॑ रक्ष त॒न्व॑श्च वन्द्य। त्रा॒ता तो॒कस्य॒ तन॑ये॒ गवा॑म॒स्यनि॑मेषं॒ रक्ष॑माण॒स्तव॑ व्र॒ते ॥

त्वम् । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । तव॑ । दे॒व॒ । पा॒युऽभिः॑ । म॒घोनः॑ । र॒क्ष॒ । त॒न्वः॑ । च॒ । व॒न्द्य॒ । त्रा॒ता । तो॒कस्य॑ । तन॑ये । गवा॑म् । अ॒सि॒ । अनि॑ऽमेषम् । रक्ष॑माणः । तव॑ । व्र॒ते ॥

Mantra without Swara
त्वं नो अग्ने तव देव पायुभिर्मघोनो रक्ष तन्वश्च वन्द्य। त्राता तोकस्य तनये गवामस्यनिमेषं रक्षमाणस्तव व्रते ॥

त्वम्। नः। अग्ने। तव। देव। पायुऽभिः। मघोनः। रक्ष। तन्वः। च। वन्द्य। त्राता। तोकस्य। तनये। गवाम्। असि। अनिऽमेषम्। रक्षमाणः। तव। व्रते ॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 34 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (देव) सब सुख देने और (वन्द्य) स्तुति करने योग्य (अग्ने) तथा यथोचित सबकी रक्षा करनेवाले सभेश्वर ! (तव) सर्वाधिपति आपके (व्रते) सत्य पालन आदि नियम में प्रवृत्त और (मघोनः) प्रशंसनीय धनयुक्त (नः) हम लोगों को और हमारे (तन्वः) शरीरों को (पायुभिः) उत्तम रक्षादि व्यवहारों से (अनिमेषम्) प्रतिक्षण (रक्ष) पालिये (रक्षमाणः) रक्षा करते हुए आप जो कि आपके उक्त नियम में वर्त्तमान (तोकस्य) छोटे-छोटे बालक वा (गवाम्) प्राणियों की मन आदि इन्द्रियाँ और गाय बैल आदि पशु हैं उनके तथा (अस्य) सब चराचर जगत् के प्रतिक्षण (त्राता) रक्षक अर्थात् अत्यन्त आनन्द देनेवाले हूजिये ॥ १२ ॥
Essence
सभापति राजा ईश्वर के जो संसार की धारणा और पालना आदि गुण हैं, उनके तुल्य उत्तम गुणों से अपने राज्य के नियम में प्रवृत्त जनों की निरन्तर रक्षा करे ॥ १२ ॥
Subject
अगले मन्त्र में भी सभापति का उपदेश किया है ॥