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Rigveda Mandal 1 / Sukta 30 / Mantra 8

191 Sukta
22 Mantra
1/30/8
Devata- इन्द्र: Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ घा॑ गम॒द्यदि॒ श्रव॑त्सह॒स्रिणी॑भिरू॒तिभिः॑। वाजे॑भि॒रुप॑ नो॒ हव॑म्॥

आ । घ॒ । ग॒म॒त् । यदि॑ । श्रव॑त् । स॒ह॒स्रिणी॑भिः । ऊ॒तिऽभिः॑ । वाजे॑भिः । उप॑ । नः॒ । हव॑म् ॥

Mantra without Swara
आ घा गमद्यदि श्रवत्सहस्रिणीभिरूतिभिः। वाजेभिरुप नो हवम्॥

आ। घ। गमत्। यदि। श्रवत्। सहस्रिणीभिः। ऊतिऽभिः। वाजेभिः। उप। नः। हवम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 29 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
(यदि) जो वह सभा वा सेना का स्वामी (नः) हम लोगों की (आ) (हवम्) प्रार्थना को (श्रवत्) श्रवण करे (घ) वही (सहस्रिणीभिः) हजारों प्रशंसनीय पदार्थ प्राप्त होते हैं जिनमें, उन (ऊतिभिः) रक्षा आदि व्यवहार वा (वाजेभिः) अन्न ज्ञान और युद्धनिमित्तक विजय के साथ प्रार्थना को (उपागमत्) अच्छे प्रकार प्राप्त हो॥८॥
Essence
जहाँ मनुष्य सभा वा सेना के स्वामी का सेवन करते हैं, वहाँ वह सभाध्यक्ष अपनी सेना के अङ्ग वा अन्नादि पदार्थों के साथ उनके समीप स्थिर होता है। इस की सहायता के विना किसी को सत्य-सत्य सुख वा विजय नहीं होते हैं॥८॥
Subject
वह किसके साथ प्राप्त हो, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥