Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 30 / Mantra 3

191 Sukta
22 Mantra
1/30/3
Devata- इन्द्र: Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सं यन्मदा॑य शु॒ष्मिण॑ ए॒ना ह्य॑स्यो॒दरे॑। स॒मु॒द्रो न व्यचो॑ द॒धे॥

सम् । यत् । मदा॑य । शु॒ष्मिणे॑ । ए॒ना । हि । अ॒स्य॒ । उ॒दरे॑ । स॒मु॒द्रः । न । व्यचः॑ । द॒धे ॥

Mantra without Swara
सं यन्मदाय शुष्मिण एना ह्यस्योदरे। समुद्रो न व्यचो दधे॥

सम्। यत्। मदाय। शुष्मिणे। एना। हि। अस्य। उदरे। समुद्रः। न। व्यचः। दधे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 28 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
मैं (हि) अपने निश्चय से (मदाय) आनन्द और (शुष्मिणे) प्रशंसनीय बल और ऊर्जा जिस व्यवहार में हो, उसके लिये (समुद्रः) (न) जैसे समुद्र (व्यचः) अनेक व्यवहार (न) सैकड़ों हजार गुणों सहित (यत्) जो क्रिया हैं, उन क्रियाओं को (सन्दधे) अच्छे प्रकार धारण करूं॥३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे समुद्र के मध्य में अनेक गुण, रत्न और जीव-जन्तु और अगाध जल है, वैसे ही अग्नि और जल के सकाश से प्रयत्न के साथ बहुत प्रकार का उपकार लेना चाहिये॥३॥
Subject
फिर वह किस प्रकार का है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥