Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 30 / Mantra 17

191 Sukta
22 Mantra
1/30/17
Devata- अश्विनौ Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आश्वि॑ना॒वश्वा॑वत्ये॒षा या॑तं॒ शवी॑रया। गोम॑द्दस्रा॒ हिर॑ण्यवत्॥

आ । अ॒श्वि॒नौ॒ । अश्व॑ऽवत्या । इ॒षा । या॒त॒म् । शवी॑रया । गोऽम॑त् । द॒स्रा॒ । हिर॑ण्यऽवत् ॥

Mantra without Swara
आश्विनावश्वावत्येषा यातं शवीरया। गोमद्दस्रा हिरण्यवत्॥

आ। अश्विनौ। अश्वऽवत्या। इषा। यातम्। शवीरया। गोऽमत्। दस्रा। हिरण्यऽवत्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 31 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (दस्रा) दारिद्र्यविनाश करानेवाले (अश्विनौ) बिजली और पृथिवी के समान विद्या और क्रियाकुशल शिल्पी लोगो ! तुम (इषा) चाही हुई (अश्वावत्या) वेग आदि गुणयुक्त (शवीरया) देशान्तर को प्राप्त करानेवाली गति के साथ (हिरण्यवत्) जिसके सुवर्ण आदि साधन हैं और (गोमत्) जिसमें सिद्ध किये हुए धन से सुख प्राप्त करानेवाली बहुत सी क्रिया हैं, उस रथ को (आयातम्) अच्छे प्रकार देशान्तर को पहुँचाइये॥१७॥
Essence
पूर्वोक्त अश्वि अर्थात् सूर्य्य और पृथिवी के गुणों से चलाया हुआ रथ शीघ्र गमन से भूमि, जल और अन्तरिक्ष में पदार्थों को प्राप्त करता है, इसलिये इसको शीघ्र साधना चाहिये॥१७॥
Subject
फिर वे कैसे हों, इसका अगले मन्त्र में प्रकाश किया है॥