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Rigveda Mandal 1 / Sukta 3 / Mantra 9

191 Sukta
12 Mantra
1/3/9
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्वे॑ दे॒वासो॑ अ॒स्रिध॒ एहि॑मायासो अ॒द्रुहः॑। मेधं॑ जुषन्त॒ वह्न॑यः॥

विश्वे॑ । दे॒वासः॑ । अ॒स्रिधः॑ । एहि॑ऽमायासः । अ॒द्रुहः॑ । मेध॑म् । जु॒ष॒न्त॒ । वह्न॑यः ॥

Mantra without Swara
विश्वे देवासो अस्रिध एहिमायासो अद्रुहः। मेधं जुषन्त वह्नयः॥

विश्वे। देवासः। अस्रिधः। एहिऽमायासः। अद्रुहः। मेधम्। जुषन्त। वह्नयः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 6 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(एहिमायासः) हे क्रिया में बुद्धि रखनेवाले (अस्रिधः) दृढ़ ज्ञान से परिपूर्ण (अद्रुहः) द्रोहरहित (वह्नयः) संसार को सुख पहुँचानेवाले (विश्वे) सब (देवासः) विद्वान् लोगो ! तुम (मेधम्) ज्ञान और क्रिया से सिद्ध करने योग्य यज्ञ को प्रीतिपूर्वक यथावत् सेवन किया करो॥९॥
Essence
ईश्वर आज्ञा देता है कि-हे विद्वान् लोगो ! तुम दूसरे के विनाश और द्रोह से रहित तथा अच्छी विद्या से क्रियावाले होकर सब मनुष्यों को सदा विद्या से सुख देते रहो॥९॥
Subject
विद्वान् लोग कैसे स्वभाववाले होकर कैसे कर्मों को सेवें, इस विषय को ईश्वर ने अगले मन्त्र में दिखाया है-