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Rigveda Mandal 1 / Sukta 3 / Mantra 8

191 Sukta
12 Mantra
1/3/8
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्वे॑ दे॒वासो॑ अ॒प्तुरः॑ सु॒तमाग॑न्त॒ तूर्ण॑यः। उ॒स्रा इ॑व॒ स्वस॑राणि॥

विश्वे॑ । दे॒वासः॑ । अ॒प्ऽतुरः॑ । सु॒तम् । आ । ग॒न्त॒ । तूर्ण॑यः । उ॒स्राःऽइ॑व । स्वस॑राणि ॥

Mantra without Swara
विश्वे देवासो अप्तुरः सुतमागन्त तूर्णयः। उस्रा इव स्वसराणि॥

विश्वे। देवासः। अप्ऽतुरः। सुतम्। आ। गन्त। तूर्णयः। उस्राःऽइव। स्वसराणि॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 6 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (अप्तुरः) मनुष्यों को शरीर और विद्या आदि का बल देने, और (तूर्णयः) उस विद्या आदि के प्रकाश करने में शीघ्रता करनेवाले (विश्वेदेवासः) सब विद्वान् लोगो ! जैसे (स्वसराणि) दिनों को प्रकाश करने के लिये (उस्रा इव) सूर्य्य की किरण आती-जाती हैं, वैसे ही तुम भी मनुष्यों के समीप (सुतम्) कर्म, उपासना और ज्ञान को प्रकाश करने के लिये (आगन्त) नित्य आया-जाया करो॥८॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है।
Subject
ईश्वर ने फिर भी उन्हीं विद्वानों का प्रकाश अगले मन्त्र में किया है-