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Rigveda Mandal 1 / Sukta 3 / Mantra 7

191 Sukta
12 Mantra
1/3/7
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- मधुच्छन्दाः वैश्वामित्रः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ओमा॑सश्चर्षणीधृतो॒ विश्वे॑ देवास॒ आग॑त। दा॒श्वांसो॑ दा॒शुषः॑ सु॒तम्॥

ओमा॑सः । च॒र्ष॒णि॒ऽधृतः॒ । विश्वे॑ । दे॒वा॒सः॒ । आ । ग॒त॒ । दा॒श्वांसः॑ । दा॒शुषः॑ । सु॒तम् ॥

Mantra without Swara
ओमासश्चर्षणीधृतो विश्वे देवास आगत। दाश्वांसो दाशुषः सुतम्॥

ओमासः। चर्षणिऽधृतः। विश्वे। देवासः। आ। गत। दाश्वांसः। दाशुषः। सुतम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 1 Varga » 6 Mantra » 1

Bhashya

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Meaning
(ओमासः) जो अपने गुणों से संसार के जीवों की रक्षा करने, ज्ञान से परिपूर्ण, विद्या और उपदेश में प्रीति रखने, विज्ञान से तृप्त, यथार्थ निश्चययुक्त, शुभगुणों को देने और सब विद्याओं को सुनाने, परमेश्वर के जानने के लिये पुरुषार्थी, श्रेष्ठ विद्या के गुणों की इच्छा से दुष्ट गुणों के नाश करने, अत्यन्त ज्ञानवान् (चर्षणीधृतः) सत्य उपदेश से मनुष्यों के सुख के धारण करने और कराने (दाश्वांसः) अपने शुभ गुणों से सबको निर्भय करनेहारे (विश्वे देवासः) सब विद्वान् लोग हैं, वे (दाशुषः) सज्जन मनुष्यों के सामने (सुतम्) सोम आदि पदार्थ और विज्ञान का प्रकाश (आ गत) नित्य करते रहें॥७॥
Essence
ईश्वर विद्वानों को आज्ञा देता है कि-तुम लोग एक जगह पाठशाला में अथवा इधर-उधर देशदेशान्तरों में भ्रमते हुए अज्ञानी पुरुषों को विद्यारूपी ज्ञान देके विद्वान् किया करो, कि जिससे सब मनुष्य लोग विद्या धर्म और श्रेष्ठ शिक्षायुक्त होके अच्छे-अच्छे कर्मों से युक्त होकर सदा सुखी रहें॥७॥
Subject
ईश्वर ने अगले मन्त्र में विद्वानों के लक्षण और आचरणों का प्रकाश किया है।

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