Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 28 / Mantra 8

191 Sukta
9 Mantra
1/28/8
Devata- उलूखलः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ता नो॑ अ॒द्य व॑नस्पती ऋ॒ष्वावृ॒ष्वेभिः॑ सो॒तृभिः॑। इन्द्रा॑य॒ मधु॑मत्सुतम्॥

ता । नः॒ । अ॒द्य । व॒न॒स्पती॒ इति॑ । ऋ॒ष्वौ । ऋ॒ष्वेभिः॑ । सो॒तृऽभिः॑ । इन्द्रा॑य । मधु॑ऽमत् । सु॒त॒म् ॥

Mantra without Swara
ता नो अद्य वनस्पती ऋष्वावृष्वेभिः सोतृभिः। इन्द्राय मधुमत्सुतम्॥

ता। नः। अद्य। वनस्पती इति। ऋष्वौ। ऋष्वेभिः। सोतृऽभिः। इन्द्राय। मधुऽमत्। सुतम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 26 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो (सोतृभिः) रस खींचने में चतुर (ऋष्वेभिः) बड़े विद्वानों ने (ऋष्वौ) अतिस्थूल (वनस्पती) काठ के उखली-मुसल सिद्ध किये हों, जो (नः) हमारे (इन्द्राय) ऐश्वर्य प्राप्त करानेवाले व्यवहार के लिये (अद्य) आज (मधुमत्) मधुर आदि प्रशंसनीय गुणवाले पदार्थों को (सुतम्) सिद्ध करने के हेतु होते हों (ता) वे सब मनुष्यों को साधने योग्य हैं॥८॥
Essence
जैसे पत्थर के मूसल और उखली होते हैं, वैसे ही काष्ठ, लोहा, पीतल, चाँदी, सोना तथा औरों के भी किये जाते हैं, उन उत्तम उलूखल मुसलों से मनुष्य औषध आदि पदार्थों के अभिषव अर्थात् रस आदि खींचने के व्यवहार करें॥८॥
Subject
फिर वे कैसे करने चाहिये, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥