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Rigveda Mandal 1 / Sukta 28 / Mantra 7

191 Sukta
9 Mantra
1/28/7
Devata- उलूखलः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ॒य॒जी वा॑ज॒सात॑मा॒ ता ह्यु१॒॑च्चा वि॑जर्भृ॒तः। हरी॑इ॒वान्धां॑सि॒ बप्स॑ता॥

आ॒य॒जी इत्या॑ऽय॒जी । वा॒ज॒ऽसात॑मा । ता । हि । उ॒च्चा । वि॒ऽज॒र्भृ॒तः । हरी॑ इ॒वेति॒ हरी॑ऽइव । अन्धां॑सि । बप्स॑ता ॥

Mantra without Swara
आयजी वाजसातमा ता ह्यु१च्चा विजर्भृतः। हरीइवान्धांसि बप्सता॥

आयजी इत्याऽयजी। वाजऽसातमा। ता। हि। उच्चा। विऽजर्भृतः। हरी इवेति हरीऽइव। अन्धांसि। बप्सता॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 26 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
(आयजी) जो अच्छे प्रकार पदार्थों को प्राप्त होनेवाले (वाजसातमा) संग्रामों को जीतते हैं (ता) वे स्त्री पुरुष (अन्धांसि) अन्नों को (बप्सता) खाते हुए (हरी) घोड़ों के (इव) समान उलूखल आदि से (उच्चा) जो अति उत्तम काम हैं, उनको (विजर्भृतः) अनेक प्रकार से सिद्धकर धारण करते रहें॥७॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे खानेवाले घोड़े रथ आदि को वहते हैं, वैसे ही मुसल और ऊखरी से पदार्थों को अलग-अलग करने आदि अनेक कार्यों को सिद्ध करते हैं॥७॥
Subject
फिर मुसल और उलूखल कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥