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Rigveda Mandal 1 / Sukta 27 / Mantra 8

191 Sukta
13 Mantra
1/27/8
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
नकि॑रस्य सहन्त्य पर्ये॒ता कय॑स्य चित्। वाजो॑ अस्ति श्र॒वाय्यः॑॥

नकिः॑ । अ॒स्य॒ । स॒ह॒न्त्य॒ । प॒रि॒ऽए॒ता । कय॑स्य । चि॒त् । वाजः॑ । अ॒स्ति॒ । श्र॒वाय्यः॑ ॥

Mantra without Swara
नकिरस्य सहन्त्य पर्येता कयस्य चित्। वाजो अस्ति श्रवाय्यः॥

नकिः। अस्य। सहन्त्य। परिऽएता। कयस्य। चित्। वाजः। अस्ति। श्रवाय्यः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 23 Mantra » 3

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1 Bhashyas
Meaning
हे (सहन्त्य) सहनशील विद्वान् ! (नकिः) जो धर्म की मर्यादा उल्लङ्घन न करने और (पर्येता) सब पर पूर्ण कृपा करनेवाले आप (यस्य) जिस (कयस्य) युद्ध करने और शत्रुओं को जीतनेवाले शूरवीर पुरुष का (श्रवाय्यः) श्रवण करने योग्य (वाजः) युद्ध करना (अस्ति) होता है, उसको सब उत्तम पदार्थ सदा दिया कीजिये, इस प्रकार आप का नियोग हम लोग करते हैं॥८॥
Essence
जैसे कोई भी जीव जिस अनन्त शुभ गुणयुक्त परिमाण सहित सब से उत्तम परमेश्वर के गुणों की न्यूनता वा उसका परिमाण करने को योग्य नहीं हो सकता, जिसका सब ज्ञान निर्भ्रम है, वैसे जो मनुष्य वर्त्तता है, वही सब राजकार्यों का स्वामी नियत करना चाहिये॥८॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥