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Rigveda Mandal 1 / Sukta 27 / Mantra 7

191 Sukta
13 Mantra
1/27/7
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
यम॑ग्ने पृ॒त्सु मर्त्य॒मवा॒ वाजे॑षु॒ यं जु॒नाः। स यन्ता॒ शश्व॑ती॒रिषः॑॥

यम् । अ॒ग्ने॒ । पृ॒त्ऽसु । मर्त्य॑म् । अवाः॑ । वाजे॑षु । यम् । जु॒नाः । सः । यन्ता॑ । शश्व॑तीः । इषः॑ ॥

Mantra without Swara
यमग्ने पृत्सु मर्त्यमवा वाजेषु यं जुनाः। स यन्ता शश्वतीरिषः॥

यम्। अग्ने। पृत्ऽसु। मर्त्यम्। अवाः। वाजेषु। यम्। जुनाः। सः। यन्ता। शश्वतीः। इषः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 23 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे (अग्ने) सेनाध्यक्ष ! आप (यम्) जिस युद्ध करनेवाले (मर्त्यम्) मनुष्य को (पृत्सु) सेनाओं के बीच (अवाः) रक्षा करें (यम्) जिस धार्मिक शूरवीर को (वाजेषु) संग्रामों में (जुनाः) प्रेरें जो इस (शश्वतीः) अनादि काल से वर्त्तमान (इषः) प्रजा की निरन्तर रक्षा करें, इस कारण से (सः) सो आप हमारा (यन्ता) नियमों में चलानेवाला नायक हूजिये, इस प्रकार हम प्रतिज्ञा करते हैं॥७॥
Essence
जैसे जगदीश्वर जो अनादि काल से वर्त्तमान प्रजा की रक्षा, रचना और व्यवस्था करनेवाला है, वैसे जो मनुष्य इस सर्वव्यापी सब प्रकार की रक्षा करनेवाले परमेश्वर की उपासना कर यथोक्त काम करता है, उसको न कभी पीड़ा वा पराजय होता है॥७॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥