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Rigveda Mandal 1 / Sukta 27 / Mantra 13

191 Sukta
13 Mantra
1/27/13
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नमो॑ म॒हद्भ्यो॒ नमो॑ अर्भ॒केभ्यो॒ नमो॒ युव॑भ्यो॒ नम॑ आशि॒नेभ्यः॑। यजा॑म दे॒वान्यदि॑ श॒क्नवा॑म॒ मा ज्याय॑सः॒ शंस॒मा वृ॑क्षि देवाः॥

नमः॑ । म॒हत्ऽभ्यः॑ । नमः॑ । अ॒र्भ॒केभ्यः॑ । नमः॑ । युव॑भ्यः । नमः॑ । आ॒शि॒नेभ्यः॑ । यजा॑म । दे॒वान् । यदि॑ । श॒क्नवा॑म । मा । ज्याय॑सः॒ । शंस॑म् । आ । वृ॒क्षि॒ । दे॒वाः॒ ॥

Mantra without Swara
नमो महद्भ्यो नमो अर्भकेभ्यो नमो युवभ्यो नम आशिनेभ्यः। यजाम देवान्यदि शक्नवाम मा ज्यायसः शंसमा वृक्षि देवाः॥

नमः। महत्ऽभ्यः। नमः। अर्भकेभ्यः। नमः। युवभ्यः। नमः। आशिनेभ्यः। यजाम। देवान्। यदि। शक्नवाम। मा। ज्यायसः। शंसम्। आ। वृक्षि। देवाः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 24 Mantra » 3

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Meaning
हे (देवाः) सब विद्याओं को प्रकाशित करनेवाले विद्वानो ! हम लोग (महद्भ्यः) पूर्ण विद्यायुक्त विद्वानों के लिये (नमः) सत्कार अन्न (यजाम) करें और दें (अर्भकेभ्यः) थोड़े गुणवाले विद्यार्थियों के (नमः) तृप्ति (युवभ्यः) युवावस्था से जो बलवाले विद्वान् हैं, उनके लिये (नमः) सत्कार (आशिनेभ्यः) समस्त विद्याओं में व्याप्त जो बुड्ढे विद्वान् हैं, उनके लिये (नमः) सेवापूर्वक देते हुए (यदि) जो सामर्थ्य के अनुकूल विचार में (शक्नवाम) समर्थ हों तो (ज्यायसः) विद्या आदि उत्तम गुणों से अति प्रशंसनीय (देवान्) विद्वानों को (आयजाम) अच्छे प्रकार विद्या ग्रहण करें, इसी प्रकार हम सब जने (शंसम्) इनकी स्तुति प्रशंसा को (मा वृक्षि) कभी न काटें॥१३॥
Essence
इस मन्त्र में ईश्वर का यह उपदेश है कि मनुष्यों को चाहिये अभिमान छोड़कर अन्नादि से सब उत्तम जनों का सत्कार करें अर्थात् जितना धन पदार्थ आदि उत्तम बातों से अपना सामर्थ्य हो उतना उनका संग करके विद्या प्राप्त करें, किन्तु उनकी कभी निन्दा न करें॥१३॥पिछले सूक्त में अग्नि का वर्णन है उसको अच्छे प्रकार जाननेवाले विद्वान् ही होते हैं, उनका यहाँ वर्णन करने से छब्बीसवें सूक्तार्थ के साथ इस सत्ताईसवें सूक्त की सङ्गति जाननी चाहिये। पिछले सूक्त में अग्नि का वर्णन है उसको अच्छे प्रकार जाननेवाले विद्वान् ही होते हैं, उनका यहाँ वर्णन करने से छब्बीसवें सूक्तार्थ के साथ इस सत्ताईसवें सूक्त की सङ्गति जाननी चाहिये।
Subject
अब अगले मन्त्र में सब का सत्कार करना अवश्य है, इस बात का प्रकाश किया है॥

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