Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 27 / Mantra 10

191 Sukta
13 Mantra
1/27/10
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
जरा॑बोध॒ तद्वि॑विड्ढि वि॒शेवि॑शे य॒ज्ञिया॑य। स्तोमं॑ रु॒द्राय॒ दृशी॑कम्॥

जरा॑ऽबोध । तत् । वि॒वि॒ड्ढि॒ । वि॒शेऽवि॑शे । य॒ज्ञिया॑य । स्तोम॑म् । रु॒द्राय॑ । दृशी॑कम् ॥

Mantra without Swara
जराबोध तद्विविड्ढि विशेविशे यज्ञियाय। स्तोमं रुद्राय दृशीकम्॥

जराऽबोध। तत्। विविड्ढि। विशेऽविशे। यज्ञियाय। स्तोमम्। रुद्राय। दृशीकम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 23 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (जराबोध) गुण कीर्त्तन से प्रकाशित होनेवाले सेनापति आप जिससे (विशेविशे) प्राणी-प्राणी के सुख के लिये (यज्ञियाय) यज्ञकर्म के योग्य (रुद्राय) दुष्टों को रुलानेवाले के लिये सब पदार्थों को प्रकाशित करनेवाले (दृशीकम्) देखने योग्य (स्तोमम्) स्तुतिसमूह गुणकीर्त्तन को (विविड्ढि) व्याप्त करते हो, (तत्) इससे माननीय हो॥१०॥
Essence
इस मन्त्र में पूर्णोपमालङ्कार है। युद्धविद्या के जाननेवाले के गुणों को श्रवण करे विना इस का ज्ञान नहीं होता और जो प्रजा के सुख के लिये अतितीक्ष्ण स्वभाववाले शत्रुओं के बल के नाश करनेहारे भृत्यों को अच्छी शिक्षा दे कर रखता है, वही प्रजापालन में योग्य होता है॥१०॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥