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Rigveda Mandal 1 / Sukta 26 / Mantra 7

191 Sukta
10 Mantra
1/26/7
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्रि॒यो नो॑ अस्तु वि॒श्पति॒र्होता॑ म॒न्द्रो वरे॑ण्यः। प्रि॒याः स्व॒ग्नयो॑ व॒यम्॥

प्रि॒यः । नः॒ । अ॒स्तु॒ । वि॒श्पतिः॑ । होता॑म् । म॒न्द्रः । वरे॑ण्यः । प्रि॒याः । सु॒ऽअ॒ग्नयः॑ । व॒यम् ॥

Mantra without Swara
प्रियो नो अस्तु विश्पतिर्होता मन्द्रो वरेण्यः। प्रियाः स्वग्नयो वयम्॥

प्रियः। नः। अस्तु। विश्पतिः। होता। मन्द्रः। वरेण्यः। प्रियाः। सुऽअग्नयः। वयम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 21 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
हे मनुष्यो ! जैसे (स्वग्नयः) जिन्होंने अग्नि को सुखकारक किया है, वे हम लोग (प्रियाः) राजा को प्रिय हैं, जैसे (होता) यज्ञ का करने-कराने (मन्द्रः) स्तुति के योग्य धर्मात्मा (वरेण्यः) स्वीकार करने योग्य विद्वान् (विश्पतिः) प्रजा का स्वामी सभाध्यक्ष (नः) हम को प्रिय है, वैसे अन्य भी मनुष्य हों॥७॥
Essence
जैसे हम लोग सब के साथ मित्रभाव से वर्त्तते और ये सब लोग हम लोगों के साथ मित्रभाव और प्रीति से सब लोग वर्त्तते हैं, वैसे आप लोग भी होवें॥७॥
Subject
फिर हम लोगों को परस्पर किस प्रकार वर्त्तना चाहिये, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥