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Rigveda Mandal 1 / Sukta 26 / Mantra 5

191 Sukta
10 Mantra
1/26/5
Devata- अग्निः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पूर्व्य॑ होतर॒स्य नो॒ मन्द॑स्व स॒ख्यस्य॑ च। इ॒मा उ॒ षु श्रु॑धी॒ गिरः॑॥

पूर्व्य॑ । हो॒तः॒ । अ॒स्य । नः॒ । मन्द॑स्व । स॒ख्यस्य॑ । च॒ । इ॒माः । ऊँ॒ इति॑ । सु । श्रु॒धी॒ । गिरः॑ ॥

Mantra without Swara
पूर्व्य होतरस्य नो मन्दस्व सख्यस्य च। इमा उ षु श्रुधी गिरः॥

पूर्व्य। होतः। अस्य। नः। मन्दस्व। सख्यस्य। च। इमाः। ऊँ इति। सु। श्रुधी। गिरः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 20 Mantra » 5

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1 Bhashyas
Meaning
हे (पूर्व्य) पूर्व विद्वानों ने किये हुए मित्र (होतः) यज्ञ करने वा करानेवाले विद्वन् ! तू (नः) हमारे (अस्य) इस (सख्यस्य) मित्रकर्म की (मन्दस्व) इच्छा कर (उ) निश्चय है कि हम लोगों को (इमाः) ये जो प्रत्यक्ष (गिरः) वेदविद्या से संस्कार की हुई वाणी हैं, उनको (सुश्रुधि) अच्छे प्रकार सुन और सुनाया कर॥५॥
Essence
मनुष्यों को उचित है कि सब मनुष्यों में मित्रता रखकर उत्तम शिक्षा और विद्या को पढ़ सुन और विचार के विद्वान् होवें॥५॥
Subject
फिर वह कैसे वर्त्ते, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥