Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 25 / Mantra 9

191 Sukta
21 Mantra
1/25/9
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वेद॒ वात॑स्य वर्त॒निमु॒रोर्ऋ॒ष्वस्य॑ बृह॒तः। वेदा॒ ये अ॒ध्यास॑ते॥

वेद॑ । वात॑स्य । व॒र्त॒निम् । उ॒रोः । ऋ॒ष्वस्य॑ । बृ॒ह॒तः । वेद॑ । ये । अ॒धि॒ऽआस॑ते ॥

Mantra without Swara
वेद वातस्य वर्तनिमुरोर्ऋष्वस्य बृहतः। वेदा ये अध्यासते॥

वेद। वातस्य। वर्तनिम्। उरोः। ऋष्वस्य। बृहतः। वेद। ये। अधिऽआसते॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 17 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जो मनुष्य (ऋष्वस्य) सब जगह जाने-आने (उरोः) अत्यन्त गुणवान् (बृहतः) बड़े अत्यन्त बलयुक्त (वातस्य) वायु के (वर्त्तनिम्) मार्ग को (वेद) जानता है (ये) और जो पदार्थ इस में (अध्यासते) इस वायु के आधार से स्थित हैं, उनके भी (वर्त्तनिम्) मार्ग को (वेद) जाने, वह भूगोल वा खगोल के गुणों का जाननेवाला होता है॥९॥
Essence
जो मनुष्य अग्नि आदि पदार्थों में परिमाण वा गुणों से बड़ा सब मूर्त्तिवाले पदार्थों का धारण करनेवाला वायु है, उसका कारण अर्थात् उत्पत्ति और जाने-आने के मार्ग और जो उसमें स्थूल वा सूक्ष्म पदार्थ ठहरे हैं, उनको भी यथार्थता से जान इनसे अनेक कार्य सिद्ध कर करा के सब प्रयोजनों को सिद्ध कर लेता है, वह विद्वानों में गणनीय विद्वान् होता है॥९॥
Subject
फिर वह क्या-क्या जानता है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥