Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 25 / Mantra 8

191 Sukta
21 Mantra
1/25/8
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वेद॑ मा॒सो धृ॒तव्र॑तो॒ द्वाद॑श प्र॒जाव॑तः। वेदा॒ य उ॑प॒जाय॑ते॥

वेद॑ । मा॒सः । धृ॒तऽव्र॑तः । द्वाद॑श । प्र॒जाऽव॑तः । वेद॑ । यः । उ॒प॒ऽजाय॑ते ॥

Mantra without Swara
वेद मासो धृतव्रतो द्वादश प्रजावतः। वेदा य उपजायते॥

वेद। मासः। धृतऽव्रतः। द्वादश। प्रजाऽवतः। वेद। यः। उपऽजायते॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 17 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
(यः) जो (धृतव्रतः) सत्य नियम, विद्या और बल को धारण करनेवाला विद्वान् मनुष्य (प्रजावतः) जिनमें नाना प्रकार के संसारी पदार्थ उत्पन्न होते हैं (द्वादश) बारह (मासः) महीनों और जो कि (उपजायते) उनमें अधिक मास अर्थात् तेरहवाँ महीना उत्पन्न होता है, उस को (वेद) जानता है, वह काल के सब अवयवों को जानकर उपकार करनेवाला होता है॥८॥
Essence
जैसे परमेश्वर सर्वज्ञ होने से सब लोक वा काल की व्यवस्था को जानता है, वैसे मनुष्यों को सब लोक तथा काल के महिमा की व्यवस्था को जानकर इस को एक क्षण भी व्यर्थ नहीं खोना चाहिये॥८॥
Subject
फिर वह क्या जानता है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥