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Rigveda Mandal 1 / Sukta 25 / Mantra 5

191 Sukta
21 Mantra
1/25/5
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
क॒दा क्ष॑त्र॒श्रियं॒ नर॒मा वरु॑णं करामहे। मृ॒ळी॒कायो॑रु॒चक्ष॑सम्॥

क॒दा । क्ष॒त्र॒ऽश्रिय॑म् । नर॑म् । आ । वरु॑णम् । क॒रा॒म॒हे॒ । मृ॒ळी॒काय॑ । उ॒रु॒ऽचक्ष॑सम् ॥

Mantra without Swara
कदा क्षत्रश्रियं नरमा वरुणं करामहे। मृळीकायोरुचक्षसम्॥

कदा। क्षत्रऽश्रियम्। नरम्। आ। वरुणम्। करामहे। मृळीकाय। उरुऽचक्षसम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 16 Mantra » 5

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Meaning
हम लोग (कदा) कब (मृळीकाय) अत्यन्त सुख के लिये (उरुचक्षसम्) जिसको वेद अनेक प्रकार से वर्णन करते हैं और (नरम्) सबको सन्मार्ग पर चलानेवाले उस (वरुणम्) परमेश्वर को सेवन करके (क्षत्रश्रियम्) चक्रवर्त्ति राज्य की लक्ष्मी को (करामहे) अच्छे प्रकार सिद्ध करें॥५॥
Essence
मनुष्यों को परमेश्वर की आज्ञा का यथावत् पालन करके सब सुख और चक्रवर्त्ति राज्य न्याय के साथ सदा सेवन करने चाहियें॥५॥
Subject
फिर वह वरुण कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥

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