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Rigveda Mandal 1 / Sukta 25 / Mantra 21

191 Sukta
21 Mantra
1/25/21
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
उदु॑त्त॒मं मु॑मुग्धि नो॒ वि पाशं॑ मध्य॒मं चृ॑त। अवा॑ध॒मानि॑ जी॒वसे॑॥

उत् । उ॒त्ऽत॒मम् । मु॒मु॒ग्धि॒ । नः॒ । वि । पाश॑म् । म॒ध्य॒मञ् चृ॒त॒ । अव॑ । अ॒ध॒मानि॑ । जी॒वसे॑ ॥

Mantra without Swara
उदुत्तमं मुमुग्धि नो वि पाशं मध्यमं चृत। अवाधमानि जीवसे॥

उत्। उत्ऽतमम्। मुमुग्धि। नः। वि। पाशम्। मध्यमञ् चृत। अव। अधमानि। जीवसे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 19 Mantra » 6

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1 Bhashyas
Meaning
हे अविद्यान्धकार के नाश करनेवाले जगदीश्वर ! आप (नः) हम लोगों के (जीवसे) बहुत जीने के लिये हमारे (उत्तमम्) श्रेष्ठ (मध्यमम्) मध्यम दुःखरूपी (पाशम्) बन्धनों को (उन्मुमुग्धि) अच्छे प्रकार छुड़ाइये तथा (अधमानि) जो कि हमारे दोषरूपी निकृष्ट बन्धन हैं, उनका भी (व्यवचृत) विनाश कीजिये॥२१॥
Essence
जैसे धार्मिक परोपकारी विद्वान् होकर ईश्वर की प्रार्थना करते हैं, जगदीश्वर उनके सब दुःख बन्धनों को छुड़ाकर सुखयुक्त करता है, वैसे कर्म हम लोगों को क्या न करना चाहिये॥२१॥चौबीसवें सूक्त में कहे हुए प्रजापति आदि अर्थों के बीच जो वरुण शब्द है, उसके अर्थ को इस पच्चीसवें सूक्त में कहने से सूक्त के अर्थ की सङ्गति पहिले सूक्त के अर्थ के साथ जाननी चाहिये॥
Subject
फिर वह परमेश्वर कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥