Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 25 / Mantra 2

191 Sukta
21 Mantra
1/25/2
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
मा नो॑ व॒धाय॑ ह॒त्नवे॑ जिहीळा॒नस्य॑ रीरधः। मा हृ॑णा॒नस्य॑ म॒न्यवे॑॥

मा । नः॑ । व॒धाय॑ । ह॒त्नवे॑ । जि॒ही॒ळा॒नस्य॑ । री॒र॒धः॒ । मा । हृ॒णा॒नस्य॑ म॒न्यवे॑ ॥

Mantra without Swara
मा नो वधाय हत्नवे जिहीळानस्य रीरधः। मा हृणानस्य मन्यवे॥

मा। नः। वधाय। हत्नवे। जिहीळानस्य। रीरधः। मा। हृणानस्य मन्यवे॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 16 Mantra » 2

Bhashya

More bhashyas
Meaning
हे वरुण जगदीश्वर ! आप जो (जिहीळानस्य) अज्ञान से हमारा अनादर करे, उसके (हत्नवे) मारने के लिये (नः) हम लोगों को कभी (मा रीरधः) प्रेरित और इसी प्रकार (हृणानस्य) जो कि हमारे सामने लज्जित हो रहा है, उस पर (मन्यवे) क्रोध करने को हम लोगों को (मा रीरधः) कभी मत प्रवृत्त कीजिये॥२॥
Essence
ईश्वर उपदेश करता है कि हे मनुष्यो ! जो अल्पबुद्धि अज्ञानीजन अपनी अज्ञानता से तुम्हारा अपराध करें, तुम उसको दण्ड ही देने को मत प्रवृत्त और वैसे ही जो अपराध करके लज्जित हो अर्थात् तुम से क्षमा करवावे तो उस पर क्रोध मत छोड़ो, किन्तु उसका अपराध सहो और उसको यथावत् दण्ड भी दो॥२॥
Subject
फिर भी अगले मन्त्र में उक्त अर्थ ही का प्रकाश किया है॥

We are thankful to https://vedicscriptures.in for providing us a substantial amount of data for this section of the Vedas.