Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 25 / Mantra 19

191 Sukta
21 Mantra
1/25/19
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ॒मं मे॑ वरुण श्रुधी॒ हव॑म॒द्या च॑ मृळय। त्वाम॑व॒स्युरा च॑के॥

इ॒मम् । मे॒ । व॒रु॒ण॒ । श्रुधि॑ । हव॑म् । अ॒द्य । च॒ । मृ॒ळ॒य॒ । त्वाम् । अ॒व॒स्युः । आ । च॒क्रे॒ ॥

Mantra without Swara
इमं मे वरुण श्रुधी हवमद्या च मृळय। त्वामवस्युरा चके॥

इमम्। मे। वरुण। श्रुधि। हवम्। अद्य। च। मृळय। त्वाम्। अवस्युः। आ। चके॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 19 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (वरुण) सब से उत्तम विपश्चित् ! (अद्य) आज (अवस्युः) अपनी रक्षा वा विज्ञान को चाहता हुआ मैं (त्वाम्) आपकी (आ चके) अच्छी प्रकार प्रशंसा करता हूँ, आप (मे) मेरी की हुई (हवम्) ग्रहण करने योग्य स्तुति को (श्रुधि) श्रवण कीजिये तथा मुझको (मृळय) विद्यादान से सुख दीजिये॥१९॥
Essence
जैसे परमात्मा जो उपासकों द्वारा निश्चय करके सत्य भाव और प्रेम के साथ की हुई स्तुतियों को अपने सर्वज्ञपन से यथावत् सुन कर उनके अनुकूल स्तुति करनेवालों को सुख देता है, वैसे विद्वान् लोग भी धार्मिक मनुष्यों की योग्य प्रशंसा को सुन सुखयुक्त किया करें॥१९॥
Subject
फिर वह कैसा है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥