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Rigveda Mandal 1 / Sukta 25 / Mantra 11

191 Sukta
21 Mantra
1/25/11
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः Chhanda- विराड्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अतो॒ विश्वा॒न्यद्भु॑ता चिकि॒त्वाँ अ॒भि प॑श्यति। कृ॒तानि॒ या च॒ कर्त्वा॑॥

अतः॑ । विश्वा॑नि । अद्भु॑ता । चि॒कि॒त्वान् । अ॒भि । प॒श्य॒ति॒ । कृ॒तानि॑ । या । च॒ । कर्त्वा॑ ॥

Mantra without Swara
अतो विश्वान्यद्भुता चिकित्वाँ अभि पश्यति। कृतानि या च कर्त्वा॥

अतः। विश्वानि। अद्भुता। चिकित्वान्। अभि। पश्यति। कृतानि। या। च। कर्त्वा॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 18 Mantra » 1

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1 Bhashyas
Meaning
जिस कारण जो (चिकित्वान्) सबको चेतानेवाला धार्मिक सकल विद्याओं को जानने न्याय करनेवाला मनुष्य (या) जो (विश्वानि) सब (कृतानि) अपने किये हुए (च) और (कर्त्त्वा) जो आगे करने योग्य कर्मों और (अद्भुतानि) आश्चर्य्यरूप वस्तुओं को (अभिपश्यति) सब प्रकार से देखता है (अतः) इसी कारण वह न्यायाधीश होने को समर्थ होता है॥११॥
Essence
जिस प्रकार ईश्वर सब जगह व्याप्त और सर्वशक्तिमान् होने से सृष्टि रचनादि रूपी कर्म और जीवों के तीनों कालों के कर्मों को जानकर इनको उन-उन कर्मों के अनुसार फल देने को योग्य है, इसी प्रकार जो विद्वान् मनुष्य पहिले हो गये उनके कर्मों और आगे अनुष्ठान करने योग्य कर्मों के करने में युक्त होता है, वही सबको देखता हुआ सब के उपकार करनेवाले उत्तम से उत्तम कर्मों को कर सब का न्याय करने को योग्य होता है॥११॥
Subject
फिर अगले मन्त्र में उक्त अर्थ का ही प्रकाश किया है॥