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Rigveda Mandal 1 / Sukta 24 / Mantra 10

191 Sukta
15 Mantra
1/24/10
Devata- वरुणः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः स कृत्रिमो वैश्वामित्रो देवरातः Chhanda- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अ॒मी य ऋक्षा॒ निहि॑तास उ॒च्चा नक्तं॒ ददृ॑श्रे॒ कुह॑ चि॒द्दिवे॑युः। अद॑ब्धानि॒ वरु॑णस्य व्र॒तानि॑ वि॒चाक॑शच्च॒न्द्रमा॒ नक्त॑मेति॥

अ॒मी इति॑ । ये । ऋक्षाः॑ । निऽहि॑तासः । उ॒च्चा । नक्त॑म् । ददृ॑श्रे । कुह॑ । चि॒त् । दिवा॑ । ई॒युः॒ । अद॑ब्धानि । वरु॑णस्य । व्र॒तानि॑ । वि॒ऽचाक॑शत् । च॒न्द्रमाः॑ । नक्त॑म् । ए॒ति॒ ॥

Mantra without Swara
अमी य ऋक्षा निहितास उच्चा नक्तं ददृश्रे कुह चिद्दिवेयुः। अदब्धानि वरुणस्य व्रतानि विचाकशच्चन्द्रमा नक्तमेति॥

अमी इति। ये। ऋक्षाः। निऽहितासः। उच्चा। नक्तम्। ददृश्रे। कुह। चित्। दिवा। ईयुः। अदब्धानि। वरुणस्य। व्रतानि। विऽचाकशत्। चन्द्रमाः। नक्तम्। एति॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 14 Mantra » 5

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Meaning
हम पूछते हैं कि जो ये (अमी) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष (ऋक्षाः) सूर्य्यचन्द्रतारकादि नक्षत्र लोक किसने (उच्चाः) ऊपर को ठहरे हुए (निहितासः) यथायोग्य अपनी-अपनी कक्षा में ठहराये हैं, क्यों ये (नक्तम्) रात्रि में (ददृश्रे) देख पड़ते हैं और (दिवा) दिन में (कुहचित्) कहाँ (ईयुः) जाते हैं। इन प्रश्नों के उत्तर-जो (वरुणस्य) परमेश्वर वा सूर्य के (अदब्धानि) हिंसारहित (व्रतानि) नियम वा कर्म हैं कि जिनसे ये ऊपर ठहरे हैं (नक्तम्) रात्रि में (विचाकशत्) अच्छे प्रकार प्रकाशमान होते हैं, ये कहीं नहीं जाते न आते हैं, किन्तु आकाश के बीच में रहते हैं (चन्द्रमाः) चन्द्र आदि लोक (एति) अपनी-अपनी दृष्टि के सामने आते और दिन में सूर्य्य के प्रकाश वा किसी लोक की आड़ से नहीं दीखते हैं, ये प्रश्नों के उत्तर हैं॥१०॥
Essence
इस मन्त्र में श्लेषालङ्कार है तथा इस मन्त्र के पहिले भाग से प्रश्न और पिछले भाग से उनका उत्तर जानना चाहिये कि जब कोई किसी से पूछे कि ये नक्षत्र लोक अर्थात् तारागण किसने बनाये और किसने धारण किये हैं और रात्रि में दीखते तथा दिन में कहाँ जाते हैं, इनके उत्तर ये हैं कि ये सब ईश्वर ने बनाये और धारण किये हैं, इनमें आप ही प्रकाश नहीं किन्तु सूर्य्य के ही प्रकाश से प्रकाशमान होते हैं और ये कहीं नहीं जाते, किन्तु दिन में ढपे हुए दीखते नहीं और रात्रि में सूर्य की किरणों से प्रकाशमान होकर दीखते हैं, ये सब धन्यवाद देने योग्य ईश्वर के ही कर्म हैं, ऐसा सब सज्जनों को जानना चाहिये॥२०॥
Subject
जो लोक अन्तरिक्ष में दिखाई पड़ते हैं, वे किस के ऊपर वा किसने धारण किये हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है॥

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