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Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 9

191 Sukta
24 Mantra
1/23/9
Devata- इन्द्रोमरुत्वान् Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ह॒त वृ॒त्रं सु॑दानव॒ इन्द्रे॑ण॒ सह॑सा यु॒जा। मा नो॑ दुः॒शंस॑ ईशत॥

ह॒त । वृ॒त्रम् । सु॒ऽदा॒न॒व॒ । इन्द्रे॑ण । सह॑सा । यु॒जा । मा । नः॒ । दुः॒ऽशंसः॑ । ई॒श॒त॒ ॥

Mantra without Swara
हत वृत्रं सुदानव इन्द्रेण सहसा युजा। मा नो दुःशंस ईशत॥

हत। वृत्रम्। सुऽदानव। इन्द्रेण। सहसा। युजा। मा। नः। दुःऽशंसः। ईशत॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 9 Mantra » 4

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे विद्वान् लोगो ! आप जो (सुदानवः) उत्तम पदार्थों को प्राप्त कराने (सहसा) बल और (युजा) अपने आनुषङ्गी (इन्द्रेण) सूर्य्य वा बिजुली के साथी होकर (वृत्रम्) मेघ को (हत) छिन्न-भिन्न करते हैं, उनसे (नः) हम लोगों के (दुःशंसः) दुःख करानेवाले (मा) (ईशत) कभी मत हूजिये॥९॥
Essence
हम लोग ठीक पुरुषार्थ और ईश्वर की उपासना करके विद्वानों की प्रार्थना करते हैं कि जिससे हम लोगों को जो पवन, सूर्य्य की किरण वा बिजुली के साथ मेघमण्डल में रहनेवाले जल को छिन्न-भिन्न और वर्षा करके और फिर पृथिवी से जलसमूह को उठाकर ऊपर को प्राप्त करते हैं, उनकी विद्या मनुष्यों को प्रयत्न से अवश्य जाननी चाहिये॥९॥
Subject
फिर वे किस प्रकार के हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-