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Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 24

191 Sukta
24 Mantra
1/23/24
Devata- अग्निः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
सं मा॑ग्ने॒ वर्च॑सा सृज॒ सं प्र॒जया॒ समायु॑षा। वि॒द्युर्मे॑ अस्य दे॒वा इन्द्रो॑ विद्यात्स॒ह ऋषि॑भिः॥

सम् । मा॒ । अ॒ग्ने॒ । वर्च॑सा । सृ॒ज॒ । सम् । प्र॒ऽजया॑ । सम् । आयु॑षा । वि॒द्युः । मे॒ । अ॒स्य॒ । दे॒वाः । इन्द्रः॑ । वि॒द्या॒त् । स॒ह । ऋषि॑ऽभिः ॥

Mantra without Swara
सं माग्ने वर्चसा सृज सं प्रजया समायुषा। विद्युर्मे अस्य देवा इन्द्रो विद्यात्सह ऋषिभिः॥

सम्। मा। अग्ने। वर्चसा। सृज। सम्। प्रऽजया। सम्। आयुषा। विद्युः। मे। अस्य। देवाः। इन्द्रः। विद्यात्। सह। ऋषिऽभिः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 12 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
मनुष्यों को योग्य है कि जो (ऋषिभिः) वेदार्थ जाननेवालों के (सह) साथ (देवाः) विद्वान् लोग और (इन्द्रः) परमात्मा (अग्ने) भौतिक अग्नि (वर्चसा) दीप्ति (प्रजया) सन्तान आदि पदार्थ और (आयुषा) जीवन से (मा) मुझे (संसृज) संयुक्त करता है, उस और (मे) मेरे (अस्य) इस जन्म के कारण को जानते और (विद्यात्) जानता है, इससे उनका संग और उसकी उपासना नित्य करें॥२४॥
Essence
जब जीव पिछले शरीर को छोड़कर अगले शरीर को प्राप्त होता है, तब उसके साथ जो स्वाभाविक मानस अग्नि जाता है, वही फिर शरीर आदि पदार्थों को प्रकाशित करता है, जो जीवों के पाप-पुण्य और जन्म का कारण है, उसको वे (ऋषि और विद्वान्) ही परमेश्वर के सिवाय जानते हैं, किन्तु परमेश्वर तो निश्चय के साथ यथायोग्य जीवों के पाप वा पुण्य को जानकर, उनके कर्म के अनुसार शरीर देकर, सुख दुःख का भोग कराता ही है॥२४॥पूर्व सूक्त से कहे हुए अश्वि आदि पदार्थों के अनुषङ्गी जो वायु आदि पदार्थ हैं, उनके वर्णन से पिछले बाईसवें सूक्त के अर्थ के साथ इस तेईसवें सूक्त के अर्थ की सङ्गति जाननी चाहिये॥
Subject
वह अग्नि किस प्रकार का है, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-