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Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 22

191 Sukta
24 Mantra
1/23/22
Devata- आपः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
इ॒दमा॑पः॒ प्र व॑हत॒ यत्किं च॑ दुरि॒तं मयि॑। यद्वा॒हम॑भिदु॒द्रोह॒ यद्वा॑ शे॒प उ॒तानृ॑तम्॥

इ॒दम् । आ॒पः॒ । प्र । व॒ह॒त॒ । यत् । किम् । च॒ । दु॒रि॒तम् । मयि॑ । यत् । वा॒ । अ॒हम् । अ॒भि॒ऽदु॒द्रोह॑ । यत् । वा॒ । शे॒पे । उ॒त । अनृ॑तम् ॥

Mantra without Swara
इदमापः प्र वहत यत्किं च दुरितं मयि। यद्वाहमभिदुद्रोह यद्वा शेप उतानृतम्॥

इदम्। आपः। प्र। वहत। यत्। किम्। च। दुरितम्। मयि। यत्। वा। अहम्। अभिऽदुद्रोह। यत्। वा। शेपे। उत। अनृतम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 12 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
मैं (यत्) जैसा (किम्) कुछ (मयि) कर्म का अनुष्ठान करनेवाले मुझमें (दुरितम्) दुष्ट स्वभाव के अनुष्ठान से उत्पन्न हुआ पाप (च) वा श्रेष्ठता से उत्पन्न हुआ पुण्य (वा) अथवा (यत्) अत्यन्त क्रोध से (अभिदुद्रोह) प्रत्यक्ष किसी से द्रोह करता वा मित्रता करता (वा) अथवा (यत्) जो कुछ अत्यन्त ईर्ष्या से किसी सज्जन को (शेपे) शाप देता वा किसी को कृपादृष्टि से चाहता हुआ जो (अनृतम्) झूँठ (उत) वा सत्य काम करता हूँ (इदम्) सो यह सब आचरण किये हुए को (आपः) मेरे प्राण मेरे साथ होके (प्रवहत) अच्छे प्रकार प्राप्त होते हैं॥२२॥
Essence
मनुष्य लोग जैसा कुछ पाप वा पुण्य करते हैं, सो सो ईश्वर अपनी न्याय व्यवस्था से उनको प्राप्त कराता ही है॥२२॥
Subject
फिर वे जल किस प्रकार के हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-