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Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 17

191 Sukta
24 Mantra
1/23/17
Devata- आपः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒मूर्या उप॒ सूर्ये॒ याभि॑र्वा॒ सूर्यः॑ स॒ह। ता नो॑ हिन्वन्त्वध्व॒रम्॥

अ॒मूः । याः । उप॑ । सूर्ये॑ । याभिः॑ । वा॒ । सूर्यः॑ । स॒ह । ताः । नः॒ । हि॒न्व॒न्तु॒ । अ॒ध्व॒रम् ॥

Mantra without Swara
अमूर्या उप सूर्ये याभिर्वा सूर्यः सह। ता नो हिन्वन्त्वध्वरम्॥

अमूः। याः। उप। सूर्ये। याभिः। वा। सूर्यः। सह। ताः। नः। हिन्वन्तु। अध्वरम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 11 Mantra » 2

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1 Bhashyas
Meaning
(याः) जो (अमूः) जल दृष्टिगोचर नहीं होते (सूर्य्ये) सूर्य वा इसके प्रकाश के मध्य में वर्त्तमान हैं (वा) अथवा (याभिः) जिन जलों के (सह) साथ (सूर्यः) सूर्यलोक वर्त्तमान है (ताः) वे (नः) हमारे (अध्वरम्) हिंसारहित सुखरूप यज्ञ को (उपहिन्वन्तु) प्रत्यक्ष सिद्ध करते हैं॥१७॥
Essence
जो जल पृथिवी आदि मूर्त्तिमान् पदार्थों से सूर्य्य की किरणों करके छिन्न-भिन्न अर्थात् कण-कण होता हुआ सूर्य के सामने ऊपर को जाता है, वही ऊपर से वृष्टि के द्वारा गिरा हुआ पान आदि व्यवहार वा विमान आदि यानों में अच्छे प्रकार संयुक्त किया हुआ सुख बढ़ाता है॥१७॥
Subject
फिर वे जल कैसे हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-