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Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 16

191 Sukta
24 Mantra
1/23/16
Devata- आपः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒म्बयो॑ य॒न्त्यध्व॑भिर्जा॒मयो॑ अध्वरीय॒ताम्। पृ॒ञ्च॒तीर्मधु॑ना॒ पयः॑॥

अ॒म्बयः॑ । य॒न्ति॒ । अध्व॑ऽभिः । जा॒मयः॑ । अ॒ध्व॒रि॒ऽय॒ताम् । पृ॒ञ्च॒तीः । मधु॑ना । पयः॑ ॥

Mantra without Swara
अम्बयो यन्त्यध्वभिर्जामयो अध्वरीयताम्। पृञ्चतीर्मधुना पयः॥

अम्बयः। यन्ति। अध्वऽभिः। जामयः। अध्वरिऽयताम्। पृञ्चतीः। मधुना। पयः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 11 Mantra » 1

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Meaning
जैसे भाइयों को (जामयः) भाई लोग अनुकूल आचरण सुख सम्पादन करते हैं, वैसे ये (अम्बयः) रक्षा करनेवाले जल (अध्वरीयताम्) जो कि हम लोग अपने आप को यज्ञ करने की इच्छा करते हैं, उनको (मधुना) मधुरगुण के साथ (पयः) सुखकारक रस को (अध्वभिः) मार्गों से (पृञ्चतीः) पहुँचानेवाले (यन्ति) प्राप्त होते हैं॥१६॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। जैसे बन्धुजन अपने भाई को अच्छी प्रकार पुष्ट करके सुख करते हैं, वैसे ये जल ऊपर-नीचे जाते-आते हुए मित्र के समान प्राणियों के सुखों का सम्पादन करते हैं और इनके विना किसी प्राणी वा अप्राणी की उन्नति नहीं हो सकती। इससे ये रस की उत्पत्ति के द्वारा सब प्राणियों को माता पिता के तुल्य पालन करते हैं॥१६॥
Subject
अब अगले मन्त्र में जल के गुण प्रकाशित किये हैं-

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