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Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 14

191 Sukta
24 Mantra
1/23/14
Devata- पूषा Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पू॒षा राजा॑न॒माघृ॑णि॒रप॑गूळ्हं॒ गुहा॑ हि॒तम्। अवि॑न्दच्चि॒त्रब॑र्हिषम्॥

पू॒षा । राजा॑नम् । आघृ॑णिः । अप॑ऽगूळ्हम् । गुहा॑ । हि॒तम् । अवि॑न्दत् । चि॒त्रऽब॑र्हिषम् ॥

Mantra without Swara
पूषा राजानमाघृणिरपगूळ्हं गुहा हितम्। अविन्दच्चित्रबर्हिषम्॥

पूषा। राजानम्। आघृणिः। अपऽगूळ्हम्। गुहा। हितम्। अविन्दत्। चित्रऽबर्हिषम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 10 Mantra » 4

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1 Bhashyas
Meaning
जिससे यह (आघृणिः) पूर्ण प्रकाश वा (पूषा) जो अपनी व्याप्ति से सब पदार्थों को पुष्ट करता है, वह जगदीश्वर (गुहा) (हितम्) आकाश वा बुद्धि में यथायोग्य स्थापन किये हुए वा स्थित (चित्रबर्हिषम्) जो अनेक प्रकार के कार्य्य को करता (अपगूढम्) अत्यन्त गुप्त (राजानम्) प्रकाशमान प्राणवायु और जीव को (अविन्दत्) जानता है, इससे वह सर्वशक्तिमान् है॥१४॥
Essence
जिस कारण जगत् का रचनेवाला ईश्वर सबको पुष्ट करने हारे हृदस्यस्थ प्राण और जीव को जानता है, इससे सबका जाननेवाला है॥१४॥
Subject
अब अगले मन्त्र में पूषन् शब्द से ईश्वर की सर्वज्ञता का प्रकाश किया है-