Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 13

191 Sukta
24 Mantra
1/23/13
Devata- पूषा Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ पू॑षञ्चि॒त्रब॑र्हिष॒माघृ॑णे ध॒रुणं॑ दि॒वः। आजा॑ न॒ष्टं यथा॑ प॒शुम्॥

आ । पू॒ष॒न् । चि॒त्रऽब॑र्हिष॒म् । आघृ॑णे । ध॒रुण॑म् । दि॒वः । आ । अ॒ज॒ । न॒ष्टम् । यथा॑ । प॒शुम् ॥

Mantra without Swara
आ पूषञ्चित्रबर्हिषमाघृणे धरुणं दिवः। आजा नष्टं यथा पशुम्॥

आ। पूषन्। चित्रऽबर्हिषम्। आघृणे। धरुणम्। दिवः। आ। अज। नष्टम्। यथा। पशुम्॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 10 Mantra » 3

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
जैसे कोई पशुओं का पालनेवाला मनुष्य (नष्टम्) खो गये (पशुम्) गौ आदि पशुओं को प्राप्त होकर प्रकाशित करता है, वैसे यह (आघृणे) परिपूर्ण किरणों (पूषन्) पदार्थों को पुष्ट करनेवाला सूर्यलोक (दिवः) अपने प्रकाश से (चित्रबर्हिषम्) जिससे विचित्र आश्चर्य्यरूप अन्तरिक्ष विदित होता है (धरुणम्) धारण करनेहारे भूगोलों को (आज) अच्छे प्रकार प्रकाश करता है॥१३॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। जैसे पशुओं को पालनेवाले अनेक काम करके, गो आदि पशुओं को पुष्ट करके, उनके दुग्ध आदि पदार्थों से मनुष्यों को सुखी करते हैं, वैसे ही यह सूर्य्यलोक चित्र-विचित्र लोकों से युक्त आकाश वा आकाश में रहनेवाले पदार्थों को, अपनी किरण वा आकर्षण शक्ति से पुष्ट करके प्रकाशित करता है॥१३॥
Subject
अब अगले मन्त्र में सूर्य्यलोक के गुण प्रकाशित किये हैं-