Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 12

191 Sukta
24 Mantra
1/23/12
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ह॒स्का॒राद्वि॒द्युत॒स्पर्यतो॑ जा॒ता अ॑वन्तु नः। म॒रुतो॑ मृळयन्तु नः॥

ह॒स्का॒रात् । वि॒ऽद्युतः॑ । परि॑ । अतः॑ । जा॒ताः । अ॒व॒न्तु॒ । नः॒ । म॒रुतः॑ । मृ॒ळ॒य॒न्तु॒ । नः॒ ॥

Mantra without Swara
हस्काराद्विद्युतस्पर्यतो जाता अवन्तु नः। मरुतो मृळयन्तु नः॥

हस्कारात्। विऽद्युतः। परि। अतः। जाताः। अवन्तु। नः। मरुतः। मृळयन्तु। नः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 10 Mantra » 2

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हम लोग जिस कारण (हस्कारात्) अति प्रकाश से (जाताः) प्रकट हुई (विद्युतः) जो कि चपलता के साथ प्रकाशित होती हैं, वे बिजली (नः) हम लोगों के सुखों को (अवन्तु) प्राप्त करती हैं। जिससे उन को (परि) सब प्रकार से साधते और जिससे (मरुतः) पवन (नः) हम लोगों को (मृळयन्तु) सुखयुक्त करते हैं (अतः) इससे उनको भी शिल्प आदि कार्यों में (परि) अच्छे प्रकार से साधें॥१२॥
Essence
मनुष्य लोग जब पहिले वायु फिर बिजुली के अनन्तर जल पृथिवी और ओषधी की विद्या को जानते हैं, तब अच्छे प्रकार सुखों को प्राप्त होते हैं॥१२॥
Subject
फिर वे पवन किस प्रकार के हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-