Available Bhashyas

Bhashyas

Choose the bhashyas to show on this mantra page.

Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 11

191 Sukta
24 Mantra
1/23/11
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
जय॑तामिव तन्य॒तुर्म॒रुता॑मेति धृष्णु॒या। यच्छुभं॑ या॒थना॑ नरः॥

जय॑ताम्ऽइव । त॒न्य॒तुः । म॒रुता॑म् । ए॒ति॒ । धृ॒ष्णु॒ऽया । यत् । शुभ॑म् । या॒थन॑ । न॒रः॒ ॥

Mantra without Swara
जयतामिव तन्यतुर्मरुतामेति धृष्णुया। यच्छुभं याथना नरः॥

जयताम्ऽइव। तन्यतुः। मरुताम्। एति। धृष्णुऽया। यत्। शुभम्। याथन। नरः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 10 Mantra » 1

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
हे (नरः) धर्मयुक्त शिल्पविद्या के व्यवहारों को प्राप्त करनेवाले मनुष्यो ! आप लोग भी (जयतामिव) जैसे विजय करनेवाले योद्धाओं के सहाय से राजा विजय को प्राप्त होता और जैसे (मरुताम्) पवनों के संग से (धृष्णुया) दृढ़ता आदि गुणयुक्त (तन्यतुः) अपने वेग को अति शीघ्र विस्तार करनेवाली बिजुली मेघ को जीतती है, वैसे (यत्) जितना (शुभम्) कल्याणयुक्त सुख है, उस सबको प्राप्त हूजिये॥११॥
Essence
इस मन्त्र में उपमालङ्कार है। हे मनुष्यो ! जैसे विद्वान् लोग शूरवीरों को सेना से शत्रुओं के विजय वा जैसे पवनों के घिसने से बिजुली के यन्त्र को चलाकर दूरस्थ देशों को जा वा आग्नेयादि अस्त्रों की सिद्धि को करके सुखों को प्राप्त होते हैं, वैसे ही तुमको भी विज्ञान वा पुरुषार्थ करके इनसे व्यावहारिक और पारमार्थिक सुखों को निरन्तर बढ़ाना चाहिये॥११॥
Subject
अब अगले मन्त्र में पवन और बिजुली के गुण उपदेश किये हैं-