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Rigveda Mandal 1 / Sukta 23 / Mantra 10

191 Sukta
24 Mantra
1/23/10
Devata- विश्वेदेवा: Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhanda- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
विश्वा॑न्दे॒वान्ह॑वामहे म॒रुतः॒ सोम॑पीतये। उ॒ग्रा हि पृश्नि॑मातरः॥

व्विश्वा॑न् । दे॒वान् । ह॒वा॒म॒हे॒ । म॒रुतः॑ । सोम॑ऽपीतये । उ॒ग्राः । हि । पृश्नि॑ऽमातरः ॥

Mantra without Swara
विश्वान्देवान्हवामहे मरुतः सोमपीतये। उग्रा हि पृश्निमातरः॥

विश्वान्। देवान्। हवामहे। मरुतः। सोमऽपीतये। उग्राः। हि। पृश्निऽमातरः॥

Ashtak » 1 Adhyay » 2 Varga » 9 Mantra » 5

Available Bhashyas

1 Bhashyas
Meaning
विद्या की इच्छा करनेवाले हम लोग (हि) जिस कारण से जो ज्ञान क्रिया के निमित्त से शिल्प व्यवहारों को प्राप्त करानेवाले (उग्राः) तीक्ष्णता वा श्रेष्ठ वेग के सहित और (पृश्निमातरः) जिनकी उत्पत्ति का निमित्त आकाश वा अन्तरिक्ष है, इससे उन (विश्वान्) सब (देवान्) दिव्यगुणों के सहित उत्तम गुणों के प्रकाश करानेवाले वायुओं को (हवामहे) उत्तम विद्या की सिद्धि के लिये जानना चाहते हैं॥१०॥
Essence
जिससे यह वायु आकाश ही से उत्पन्न आकाश में आने-जाने और तेज स्वभाववाले हैं, इसी से विद्वान् लोग कार्य्य के अर्थ इनका स्वीकार करते हैं॥१०॥
Subject
फिर वे किस प्रकार के हैं, इस विषय का उपदेश अगले मन्त्र में किया है-